पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी परीक्षा है। तीन साल के पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के दौरान जो कश्मीर में स्थिति बनी है वह असेंबली चुनावों के लिए अनुकूल नहीं है।
अनंतनाग के शंगस में एक रैली के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने कहा कि पीडीपी दिल्ली में चुनाव के स्थगित होने की मांग कर रही है। चूंकि पार्टी ने कश्मीर में जमीन खो दी है और पीडीपी की मांग बीजेपी पर भारी पड़ रही है जो अपने मजबूत गढ़ जम्मू में भी हार गई है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों को टालना और लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग कराना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी विफलता होगी, क्योंकि इससे एक संदेश जाएगा कि मोदी सरकार विधानसभा में पकड़ बनाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने में विफल रही है।
उमर ने कहा कि विधानसभा पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ध्यान में रखते हुए किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के छह माह के भीतर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होना प्रधानमंत्री मोदी के लिए बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि नेकां हमेशा चुनाव के संचालन के लिए खड़ा है और राज्य में विधानसभा चुनाव के किसी भी टालमटोल के विरोध में है। इस अवसर पर पार्टी के अन्य नेता बशीर अहमद वीरी, अल्ताफ अहमद कुलू, अब्दुल मजीद लार्मी भी मौजूद रहे।