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यहां दो मिनट में हो जाती है बस की फिटनेस

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पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में अनफिट बसें दौड़ रही हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। इसका कारण इन बसों को दिए जाने वाले फिटनेस सर्टिफिकेट हैं। करीब 40 मिनट तक होने वाली टेस्टिंग को दो मिनटों में ही ओके किया जा रहा है।
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रामबन, राजोरी और पुंछ जिलों में सबसे अधिक अनफिट बसें दौड़ रही हैं। इनकी जांच के लिए विभाग ने ठोस कदम उठाने की योजना बनाई है। जानकारी के अनुसार विभाग के फार्म-14 के तहत व्यवसायिक वाहनों की 78 पुर्जों की जांच करनी होती हैं।

इसके लिए कम से कम 40 मिनट का वक्त लगता है, लेकिन वाहनों की जांच दो से तीन मिनटों में ही निपटा दी जाती है। वाहनों को पास करते वक्त बनाए गए डग के ऊपर इसे खड़ा करना होता है।
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इसके बाद इसके इसकी चेचिस की जांच करनी होती है, लेकिन वाहनों को दूर से देखकर ही इसे ओके कर दिया जाता है। ऐसे में अनफिट वाहन को भी फिट होने का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है।
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सभी की है मिलीभगत

विभाग के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक की इसमें मिलीभगत सामने आ रही है। बसों के अलावा आटो रिक्शा, ट्रकों, मेटाडोर आदि को भी फिटनेस की आवश्यकता है। दरअसल, इनके फिटनेस सर्टिफिकेट भी हवा में ही बनाए जा रहे हैं। जम्मू आरटीओ कार्यालय सहित संभाग के अन्य एआरटीओ कार्यालयों में भी ऐसा हो रहा है।

परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव, जीए सोफी ने बताया कि विभाग को इसकी जानकारी मिली है। बड़े अधिकारी इस पर निजी तौर पर नजर रखेंगे। फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने वाले दिन विभाग के उच्च अधिकारी गुपचुप तरीके से इसकी जांच करेंगे। इसका खुलासा करने में वक्त लगेगा, लेकिन बहुत जल्द ऐसा करने वालों को सामने लाया जाएगा। अनफिट वाहनों को फिट करने का सर्टिफिकेट जारी होना खतरनाक है।
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