रियासत में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए कालेजों के नए भवन खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन खेलों की तरफ विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाने के लिए कुछ खास नहीं हो पाया है। विश्वविद्यालय का शारीरिक शिक्षा विभाग भी इन अनदेखी का शिकार है। विभाग अंतर कालेज स्तर पर 36 खेलों की मेजबानी कर रहा है, लेकिन उसके पास सिर्फ चार ही कोच उपलब्ध हैं।
बाकी के खेल राम भरोसे ही चल रहे हैं। यही नहीं अक्तूबर और नवंबर माह में विश्वविद्यालय अंतर विश्वविद्यालय और नार्थ जोन स्तर की बैडमिंटन तथा हैंडबाल प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। इन खेलों में भी विश्वविद्यालय के पास कोचों का टोटा है। इसके विपरीत कश्मीर विश्वविद्यालय में 12 कोचों के पद सृजित हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1976 के बाद शारीरिक शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय में कोच का कोई नया पद सृजित नहीं हो पाया है। विभाग के पास टेबल टेनिस, फुटबाल, वालीबाल और क्रिकेट कोच के ही स्थायी पद सृजित हैं, जबकि अन्य किसी भी खेल में कोई स्थायी पद ही नहीं है। इसके अलावा पिछले करीब डेढ़ साल से विभाग में सहायक निदेशक का पद खाली पड़ा है।
इसी तरह पीटीआई कैंपस का पद भी कई वर्षों से खाली है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विश्वविद्यालय का शारीरिक शिक्षा विभाग किस गति से चल रहा है। विभाग के निदेशक प्रो. ध्यान सिंह भाऊ के अनुसार विभाग ने एथलेटिक, हाकी, रेसलिंग/जूडो, कबड्डी/खो-खो, बैडमिंटन, बास्केटबाल के कोचों के पद मांगें गए हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है।