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Jammu News: यूजीसी के नियमों पर विरोध तेज, संशोधन और स्पष्टता की मांग

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- एवीबीपी ने कहा- भ्रम की स्थिति को खत्म करे सरकार
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- सवर्ण संगठनों ने संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग की

जम्मू। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता से जुड़े यूजीसी के नए नियम को लेकर छात्र, सामाजिक संगठनों और नेताओं के बीच विरोध और समर्थन का सिलसिला जारी है। छात्र संगठनों ने नियमों में संशोधन, भाषा की स्पष्टता और सभी वर्गों को बराबर सुरक्षा देने की मांग की। कुछ नेताओं ने नियमों के उद्देश्य का समर्थन करते हुए दुरुपयोग रोकने पर जोर दिया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री सनक श्रीवत्स ने कहा कि नियमों का उद्देश्य भेदभाव मुक्त माहौल बनाना है लेकिन कुछ प्रावधान की भाषा साफ नहीं है। यूजीसी को तुरंत इस पर संज्ञान लेकर स्पष्टता लानी चाहिए। एनएसयूआई नेता जयसिध भल्ला ने भी संशोधन की मांग की। उन्होंने शिकायत करने वाले छात्र के खिलाफ कार्रवाई न होने के प्रावधान का समर्थन किया और कहा कि कानून संतुलित होना चाहिए।
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जम्मू प्रेस क्लब में सवर्ण सामाजिक संगठनों ने नियमों को वापस लेने या तुरंत संशोधन करने की मांग की। इसी तरह मूवमेंट कल्कि के पदाधिकारियों ने जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित किया गया है। इससे आशंका है कि सामान्य वर्ग के छात्रों को भेदभाव की स्थिति में कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी।। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और डीडीसी सदस्य तरनजीत सिंह टोनी ने नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि नियम वंचित और कमजोर वर्गों के खिलाफ भेदभाव रोकने की दिशा में जरूरी कदम है। जो लोग सही तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। यह भी कहा कि समानता समितियां और शिकायत निवारण व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इनके कामकाज में पारदर्शिता, तय समयसीमा और जवाबदेही होनी चाहिए।
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किसी भी वर्ग के साथ नहीं होगा भेदभाव : प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आशंकाओं पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह नियम उच्चतम न्यायालय की निगरानी में अधिसूचित किए गए हैं और किसी को भी भेदभाव के नाम पर कानून का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा।
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