उधमपुर जिले में दोबारा आतंकवाद को जिंदा करने की साजिशें हो रही हैं। लोगों में दहशत पैदा करने के लिए पिछले 6 महीनों में 3 बार स्टिकी बम से धमाके किए गए हैं। इस तरह के हमलों से उधमपुर में भी सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का मानना है कि उधमपुर में सेना की उत्तरी कमान है और जम्मू-कश्मीर के बीच उधमपुर एक बांध है, जिसे प्रभावित करने की एक साजिश हो रही है। संभव है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन डोडा, किश्तवाड़ में मौजूद आतंकी मददगारों की मदद से एक दल तैयार कर रहे हैं और यही लोग इन धमाकों के पीछे हो सकते हैं।
लिहाजा पुलिस और अन्य एजेंसियों के खुफिया तंत्र को मिलकर काम करना होगा और इस दल का पता लगाना होगा। इस मार्च में हुए धमाके में एक व्यक्ति की जान गई थी। इस बार बुधवार को हुए धमाके में दो लोग घायल हुए हैं। लिहाजा भविष्य में ऐसा कुछ न हो और इसलिए इसे रोकने के लिए पता लगाना जरूरी है।
1991 से 1995 तक आतंकवाद था
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि वह 1991 से लेकर 1995 के बीच उधमपुर में एसएसपी रहे हैं। तब आतंकी संगठन डोडा, बसंतगढ़, डुडु और मरमत के युवाओं को आतंकी बनने के लिए प्रोत्साहित करते थे। कई युवा इसमें शामिल भी हुए। मेरा मानना है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर इन क्षेत्रों में दोबारा युवाओं को कट्टरता का पाठ पढ़ाकर उनको आतंकी गतिविधियों में शामिल करवा रहे हैं। उधमपुर में हमलों के पीछे भी कोई स्थानीय ही हो सकता है।
मोदी के दौरे से पहले दहशत पैदा की गई
बता दें कि इस साल अप्रैल में जम्मू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के ठीक दो दिन पहले जम्मू के बठिंडी में आतंकी हमला हुआ था। दौरे के दिन सुबह बिश्नाह में संदिग्ध बम धमाका भी हुआ था। इसके कुछ दिन पहले ही उधमपुर में धमाका हुआ था। ठीक मोदी की तरह ही अमित शाह के दौरे को लेकर दहशत पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उधमपुर में दो धमाके किए गए और पुंछ में आईईडी बरामद की गई।
वहीं उधमुपर और कटड़ा में पिछले 6 महीनों के भीतर 5 बार संदिग्ध धमाकों का प्रयास किया गया। एक बार कटड़ा में बस में धमाका किया गया। इसके बाद उधमपुर आ रही बस में जिलेटिन स्टिक बरामद की गईं। उधमपुर के सलाथिया चौक पर धमाका किया गया। अब उधमपुर में फिर से बसों के अंदर दो धमाके किए गए।