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जम्मू में पाक की बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, मिलिट्री स्टेशन की जानकारी भेजने वाले दो गिरफ्तार

Wed, 29 May 2019 01:27 AM IST
Pranjal Dixit प्रांजल दीक्षित, जम्मू
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सेना (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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आर्मी स्टेशन (सैन्य कैंप) रतनूचक की जानकारी पाकिस्तान भेजने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सेना ने इस मामले में दो संदिग्धों को पकड़ा है जो वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर रहे थे। उनसे दो मोबाइल बरामद किए गए हैं। जब इनकी जांच की गई तो उनमें एक दर्जन से ज्यादा नंबर पाकिस्तान के मिले हैं। इसमें से एक नंबर पर वीडियो भेजा जा रहा था। इसमें रतनूचक आर्मी स्टेशन की पूरी जानकारी थी।  

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मंगलवार शाम को दो युवक रतनूचक इलाके में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होते देखे गए। इसकी जानकारी मौके पर तैनात जवानों ने अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंचे सैन्य अधिकारियों ने दोनों युवकों को पकड़ा। वह उस दौरान कुछ वीडियो पाकिस्तान भेज रहे थे। सूत्रों के मुताबिक दोनों से मीरा साहिब के ज्वाइंट इंटेरोगेशन सेंटर में पूछताछ की जा रही है।

मौके पर पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां के अधिकारी डटे हुए हैं। इसके साथ ही उनके अन्य साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पकड़े गए संदिग्धों की पहचान राजोरी निवासी नईम अख्तर और कठुआ मलार निवासी मुस्ताक अहमद के तौर पर हुई है। 
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संदिग्धों के पास से मिला नक्शा 
सैन्य सूत्रों की माने तो इन दोनों संदिग्धों के पास से भारत और जम्मू का नक्शा मिला है। इन नक्शों पर कई मार्किंग भी की गई है। ऐसे में यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि आतंकी एक बड़ी साजिश को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।   

व्हाट्सएप के जरिए पाक भेजा जा रहा था वीडियो 
संदिग्ध युवक व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए पाक में बैठे आतंकियों को मिलिट्री स्टेशन की रेकी करा रहे थे। उन्होंने मिलिट्री स्टेशन के आसपास और कई अन्य घुसपैठ के रास्तों की वीडियो पाकिस्तान भेजी है। जिस वक्त उन्हें पकड़ा गया वह एक वीडियो भेज रहे थे। 

बीते साल भी हो चुका है हमला 
रतनूचक में सेना की 3 ब्रिगेड ऑफिसर क्वार्टर पोस्ट को आतंकियों ने बीते साल 30 दिसम्बर को निशाना बनाकर फायरिंग की थी। हालांकि, इसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ था। जवाबी कार्रवाई में एक संदिग्ध घायल हुए थे। मगर वह फरार हो गए थे।

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जम्मू संभाग में हुए मुख्य फिदायीन हमले

17 नवंबर 2001- डोडा के रामबन क्षेत्र में लश्कर के फिदायीन का हमला। दस जवान शहीद। चार नागरिकों की मौत।

14 मई 2002- कालू चक स्थित सैन्य क्षेत्र में फिदायीन हमले में तीन आतंकी ढेर। 36 सैन्यकर्मी और उनके परिवार वालों की मौत, 48 जख्मी।

24 नवंबर 2002- जम्मू के रघुनाथ मंदिर में फिदायीन हमला। तीन आतंकियों सहित 13 लोगों की मौत।

14 मार्च 2003- पुंछ बस स्टैंड में फिदायीन हमले में एक डीएसपी और तीन नागरिकों की मौत।

15 मई 2003- पुंछ शहर में पुलिस की वर्दी में आतंकियों द्वारा सेना कैंप के बाहर फिदायीन हमले में एक जवान की मौत। हमलावर मौके से फरार, लेकिन बाद में मारा गया।

28 जून 2003- जम्मू के सुजआं इलाके में सेना की डोगरा रेजीमेंट पर फिदायीन हमला। 12 जवान शहीद। एक लेफ्टिनेंट सहित सात जख्मी। दोनों फिदायीन हमले में मारे गए।

22 जुलाई 2003- अखनूर के टांडा रोड स्थित आर्मी कैंप में फिदायीन हमला। एक ब्रिगेडियर सहित आठ जवानों की मौत। चार जनरल, एक ब्रिगेडयर और दो कर्नल सहित 12 जख्मी।

04 सितंबर 2003- पुंछ शहर स्थित सुरक्षा बलों के कैंप में फिदायीन हमला। दो विदेशी और एक महिला की मौत। 

02 जनवरी 2004- जम्मू रेलवे स्टेशन पर फिदायीन हमला। चार जवान शहीद। नौ जवानों सहित 15 जख्मी हुए थे।

27 अगस्त 2008 - जम्मू के बाहरी इलाके काना चक सेक्टर में तीन फिदायीन आतंकियों ने हमला किया। तीन सेना के जवान शहीद हुए। पांच नागरिकों की भी घटना में मौत। 

05 अगस्त 2009- पुंछ के मंडी सेक्टर में सैन्य कैंप में फिदायीन हमले में तीन आतंकी ढेर। 

29 नवम्बर 2016- नगरोटा के आर्मी आर्टिलरी कैंप पर तीन आतंकियों ने हमला किया। इस हमले में सात जवान शहीद हुए थे। वहीं तीनों आतंकी भी मार गिराए गए थे। 
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