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Gor Effect: ट्रेवल एडवाइजरी से बदलेगा कश्मीर का नैरेटिव, अमेरिकी राजदूत के दौरे में छिपे बड़े कूटनीतिक संकेत

Thu, 20 Aug 2026 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक राज, श्रीनगर

सार

अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा और अमेरिकी ट्रेवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत महज पर्यटन से जुड़ा मामला नहीं है। इसके पीछे कश्मीर की सुरक्षा स्थिति, भारत-अमेरिका संबंध और दक्षिण एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरण की एक बड़ी तस्वीर भी उभरती है।
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भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की वर्षों पुरानी सुरक्षा धारणा में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा और अमेरिकी ट्रेवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत महज पर्यटन से जुड़ा मामला नहीं है। इसके पीछे कश्मीर की सुरक्षा स्थिति, भारत-अमेरिका संबंध और दक्षिण एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरण की एक बड़ी तस्वीर भी उभरती है।

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गोर ने बुधवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र के लिए जारी ट्रेवल वार्निंग की समीक्षा करेगा। केंद्र सरकार ने क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गोर की यह बात इस दौरे को महत्वपूर्ण बनाती है।

अमेरिकी विदेश विभाग की मौजूदा एडवाइजरी में जम्मू-कश्मीर अब भी लेवल-4 यानी ‘यात्रा न करें’ श्रेणी में है। इसमें आतंकवाद और नागरिक अशांति को खतरे के रूप में बताया गया है। यह अलग बात है कि पूर्वी लद्दाख और लेह को इस चेतावनी से अलग रखा गया है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का उसी क्षेत्र में आना, जमीनी स्थिति देखना और सुरक्षा में सुधार को स्वीकार करना अमेरिका की पिछली धारणा में बदलाव का संकेत है।
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यह केवल पर्यटन का सवाल नहीं
अमेरिका की ट्रेवल एडवाइजरी सिर्फ उसके नागरिकों को यात्रा संबंधी सलाह नहीं देती, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी सुरक्षा संकेत होती है। ऐसे में यदि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के संबंध में अपनी एडवाइजरी को नरम करता है, तो इसका असर पर्यटकों की संख्या से कहीं व्यापक होगा। इससे यह संदेश जाएगा कि कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को लेकर वाशिंगटन का आकलन बदल रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर को केवल संघर्ष और आतंकवाद के चश्मे से देखने वाली धारणा कमजोर होगी और नए कश्मीर की सतरंगी तस्वीर निखरेगी।

कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा...संदेश साफ है
गोर का यह कहना कि जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, उनके दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान लगातार पीओके में बर्बरता कर रहा है। इसके उलट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर को विवाद के रूप में पेश कर रहा है। ऐसे में गोर का श्रीनगर में आकर जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना पाकिस्तान के उस नैरेटिव के लिए संदेश है, जिसमें वह कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का विषय बनाने की कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान के लिए बदलता समीकरण
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद कहते हैं कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एक तरफ अमेरिका के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ चीन उसका प्रमुख रणनीतिक साझेदार बना हुआ है। हाल के वर्षों में चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग बढ़ा है। पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में चीन निर्मित उपकरणों और तकनीक की भूमिका बढ़ी है। हाल में पाकिस्तानी सेना में चीन निर्मित जेड-10 एमई अटैक हेलीकॉप्टर को शामिल किया जाना भी इसी बढ़ते रक्षा सहयोग का उदाहरण है।

चीन से रिश्तों में भी नया संतुलन
कश्मीर मसले के जानकार वरिष्ठ पत्रकार जोरावर सिंह जमवाल कहते हैं कि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा में बदलाव ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के रिश्ते भी टकराव से संवाद की ओर बढ़े हैं। भारत और चीन ने सीमा मामलों पर 36वीं डब्ल्यूएमसीसी बैठक की है। दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। जम्मू-कश्मीर का भूगोल भारत, पाकिस्तान और चीन का त्रिकोण बनाता है।

पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र, चीन के कब्जे वाले अक्साई चीन और लद्दाख की संवेदनशील सीमा, तीनों का संबंध जम्मू-कश्मीर के भूगोल से है। इसीलिए श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत की मौजूदगी को केवल घाटी के पर्यटन की दृष्टि से देखना अधूरा होगा। यह उस व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया की बड़ी रणनीति में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है।

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