सांबा। कस्बे के कालीबड़ी रेलवे स्टेशन पर तीन साल से रेल गाड़ियों का ठहराव नहीं होने से लोगों में रोष है। कोरोना से पहले यहां 12 ट्रेनों का ठहराव था, अब केवल दो ही रुक रही हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सांबा में सिडको के तीन फेस हैं, जिनमें ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी बाहरी राज्यों से हैं। एक सेना के ब्रिगेड सहित बीएसएफ की तीन वाहिनी और एसएसबी का मुख्यालय है। सांबा से सात किलोमीटर दूर एम्स है। ऐसे में सभी को सांबा रेलवे स्टेशन से ही आना जाना रहता है। कोरोना के दौरान सांबा रेलवे स्टेशन से यह कहकर रेल गाड़ियों को बंद कर दिया गया कि यहां पर यात्रियों के कोरोना के सैंपल लेने के लिए प्रबंध नहीं है सीधे जम्मू ही सैंपल लिए जाएंगे। कोरोना खत्म हो गया लेकिन रेल गाड़ियों का ठहराव नहीं किया गया। आज केवल दो ही गाड़ियों का ठहराव है। इससे अब लोगों को 42 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू और 50 किलोमीटर का सफर तय कर कठुआ के रेलवे स्टेशन से रेल गाड़ी पकड़नी पड़ रही है। इसमें धन और समय की बर्बादी हो रही है। कोरोना से पहले हीरानगर, घगवाल व विजयपुर में भी रेल गाड़ियों का ठहराव था। हीरानगर के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इसका लाभ मिलता था। घगवाल निवासी रामपाल शर्मा ने कहा कि घगवाल रेलवे स्टेशन पर कोरोना से पहले हेमकुंड एक्सप्रेस, जम्मू मेल, सियालदा एक्सप्रेस की तीन रेल गाड़ियों का ठहराव था आज एक भी नहीं रुक रही है। उन्होंने कहा कि घगवाल में एसएसबी और सीआरपीएफ है। इसके साथ आम लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार घगवाल, हीरानगर, दियालाचक, बुद्धी, विजयपुर, बाड़ी ब्राह्मणा रेलवे स्टेशनों पर पर भी रेल गाड़ियों का ठहराव था जहां आज एक भी रेलगाड़ी का ठहराव नहीं है। विजयपुर के बबल गुप्ता के अनुसार विजयपुर में कोरोना से पहल आठ रेल गाड़ियों का ठहराव था। आज एक भी नहीं रुक रही है। यहां नौकरी पेशा व छात्रों को ज्यादा परेशानी हो रही है उन्होंने मासिक पास बना रखे थे और आसानी से जम्मू जाते थे। अब समय व धन की अधिक बर्बादी हो रही है। कठुआ से जम्मू तक के आधा दर्जन रेलवे स्टेशन बंद पड़े हुए हैं। वहीं हरिद्वार के लिए जाने वाली रेल का भी ठहराव नहीं होने से श्रद्धालु परेशान हैं। मिली जानकारी के अनुसार आधा दर्जन रेलवे स्टेशनों पर हर रोज एक हजार से अधिक लोगों का आना जाना लगा रहता था।
बाक्स
हमने जिला प्रशासन, जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव, एलजी, रेलवे के जनरल मैनेजर डिविजन फिरोजपुर, केंद्रीय मंत्रियों को भी लिखित में समस्या से अवगत करवाया लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है।
-रविंद्र सिंह, पूर्व सरपंच कैली मंडी सांबा
.....................
सांबा के काली बाड़ी रेलवे स्टेशन पर रेलों की आवाजाही से स्थानीय लोगों का रोजगार चल रहा था। यह तीन वर्ष से चौपट होकर रह गया है। उन्होंने अपनी ओर से इस समस्या को उठाया था, मगर किसी ने कोई तरजीह नहीं दी।
कृष्ण लाल, पूर्व सरपंच काली बड़ी सांबा।
बाक्स
कालीबड़ी रेलवे स्टेशन पर रेलों के ठहराव नहीं होने का मुद्दा लोकसभा चुनाव में भी उठाया गया था। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कठुआ में बंदे भारत का ठहराव करवा दिया, जबकि सांबा की एक बार फिर से अनदेखी की जा रही है।
-विनोद कुमार, पूर्व सरपंच रख अंब टाली सांबा
...................
सांबा की अनदेखी की जा रही है। कश्मीर में रेल पहुंचाई जा रही है, इसका हम स्वागत करते हैं लेकिन सांबा रेलवे स्टेशन पर जो रेलगाड़ियां रुकती थीं, उन्हें क्यों नहीं बहाल किया जा रहा है।
-नीलम सिंह सामाजिक कार्यकर्ता सांबा
...................
हमने संसद में भी सांबा रेलवे स्टेशन पर रेल गाड़ियों के ठहराव का मुददा उठाया था। रेलवे मंत्री को भी अवगत करवाया था। हमें आश्वासन दिया गया था। अब दोबारा संसद के सत्र में इस समस्या को उठाया जाएगा।
-जुगल किशोर शर्मा सांसद जम्मू