अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तीन नए आपराधिक कानून केवल दंडित करने के लिए नहीं हैं, बल्कि पीड़ित के पुनर्वास का ध्यान भी रखते हैं। नए कानून संविधान की भावना के अनुरूप हैं, जिनकी आत्मा भारतीय है। पहली बार हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली भारतीयों द्वारा और उनके लिए बनाए गए भारत के कानूनों द्वारा शासित होगी। यह बात जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने तीन नए कानून के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए आयोजित कार्यक्रम में कही।
न्यायिक अकादमी जानीपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन, पुलिस अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के अनुसंधान सहायकों सहित जम्मू प्रांत के फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के अधिकारी भाग ले रहे है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने उद्घाटन भाषण में तीन नए कानूनों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ये नए कानून केवल दंडित करने के लिए नहीं हैं, बल्कि पीड़ित के पुनर्वास को समान रूप से ध्यान में रखते है। विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले लोगों को न्याय प्रदान करने के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक सेवा जैसे दंड देने का नया तरीका जनता की बदलती भावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने इस इन कानूनों का उद्देश्य व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखें और समाज में सकारात्मक योगदान दें। उन्होंने बताया कि बीएनएसएस का उद्देश्य तीव्र और अधिक कुशल न्याय प्रणाली प्रदान करना है, ताकि भारी लंबित मामलों में देरी, कम सजा दर, कानूनी प्रणाली में प्रौद्योगिकी का न्यूनतम उपयोग और फोरेंसिक के अपर्याप्त उपयोग जैसे मुद्दों का समाधान किया जा सके। जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी के निदेशक, वाई.पी. बॉर्नी ने कार्यक्रम के मूल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अधिनियम महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव करता है, जिसमें इसकी लंबाई कम करने के लिए कुछ आईपीसी प्रावधानों को सुव्यवस्थित करना भी शामिल है। पहले दिन के कार्य सत्र की अध्यक्षता अधिवक्ता सकल भूषण ने की। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के तहत अध्यायों और अनुभागों के परिवर्धन, विलोपन, संशोधन और पुनर्गठन पर एक सिंहावलोकन दिया।