जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले की माहौर तहसील के वासा गांव में एक ही परिवार के तीन बच्चों में डिपखेरिया यानी गलघोंटू बीमारी के लक्षण पाए जाने और एक बच्ची की मौत के बाद से ग्रामीणों में हड़कंप की स्थिति है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दौरा कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। फिलहाल किसी अन्य में इस बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं।
लगभग दस दिन पहले वासा निवासी मोहम्मद शरीफ की बेटी गुलशाद(9) को गले में तकलीफ के साथ ही बुखार लगने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से उसे जम्मू भेजा गया था, जहां उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग को बीमारी का पता चलते ही मौके पर माहौर से स्वास्थ्य कर्मचारियों की एक टीम गांव पहुंची, जिसने मोहम्मद शरीफ के घर के आसपास रहने वाले अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। इस दौरान लोगों को एहतियात बरतने की सलाह भी दी। उधर, मोहम्मद शरीफ के बेटे कामरान(12), बेटी शमशाद(7) और गुलनाज(2) को भी वैसी ही तकलीफ से पीड़ित होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें पहले जम्मू और बाद में चंडीगढ़ के लिए भेज दिया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर परविंदर सिंह के अनुसार इस तरह की बीमारी मृतक मवेशियों से फैलने वाले किटाणुओं से होती है। गांव में लोग मवेशी मरने के बाद उसको कही पर भी फेंक देते हैं। उनसे फैलने वाले किटाणु किसी को भी बीमार कर सकते हैं। इन स्थितियों में सफाई आदि का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि गुलशाद की मौत समय से उपचार नहीं मिलने के कारण हुई। अन्य तीन बच्चों का उपचार चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है।