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कश्मीर घाटी में अब जजों को जान का खतरा, सरकार से जवाब तलब

Sat, 20 Aug 2016 09:50 PM IST
जेएनएफ /जम्मू
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कोर्ट - फोटो : Demo Pic.
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घाटी में हिंसा से उपजे हालात में न्यायिक अधिकारियों को भी जान का खतरा है। बांदीपोरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश और चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने अपनी जान को खतरा बताया है।
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रजिस्ट्रार जनरल के पास पहुंचे पत्र का हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एनपाल वसंथाकुमार और जस्टिस अली मोहम्मद मागरे की डिविजन बेंच ने एडवोकेट जनरल और असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल आफ इंडिया से लिखित में जवाब मांगा है।

डिविजन बेंच ने आदेश देते हुए कहा न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त सुनिश्चित करें। यह भी देखें कि अदालती स्टाफ सदस्य अपनी ड्यूटी निभाने के लिए सुरक्षित माहौल में आवाजाही कर रहे हैं।
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आईजीपी कश्मीर को सुरक्षा के इंतजाम के निर्देश

श्रीनगर में तैनात सुरक्षा बल के जवान - फोटो : PTI
बेंच ने आईजीपी कश्मीर को आदेश देकर कहा तत्काल प्रभाव से सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। यदि किसी भी न्यायिक अधिकारी अथवा मुलाजिम को कोर्ट ड्यूटी देने से रोका जाता है तो इसका कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।

बांदीपोरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पत्र में कहा है कि वह और उनके सीजेएम दोनों की जान को खतरा है। अदालत की संपत्ति पर भी खतरा मंडरा रहा है। वहीं अदालत के जमादार ने 20 अगस्त को लिखे पत्र में सुरक्षा बलों की ज्यादती को बयान किया है।

जमादार के अनुसार वह ड्यूटी के लिए जा रहा था। रास्ते में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने उसे नाटीपोरा धार्मिक स्थल के पास रोका और पहचान पत्र दिखाए जाने के बावजूद उसकी पिटाई कर दी। सुरक्षा बलों ने जजों और हाईकोर्ट के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया।
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