जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने पर राज्य पुलिस में तैनात एसपीओ को भी किस्मत बदलने का उम्मीद जगी है। वर्षों बाद एसपीओ का मानदेय बढ़ाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही एसपीओ को फायदा दे दिया था। लेकिन अब एसपीओ नियमितीकरण की उम्मीद लगाए हुए हैं। मौजूदा समय में कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर आतंकियों का सामना करने तक हर मोर्चे पर एसपीओ डटकर मुकाबला करते हैं। .
जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस में 30 हजार के आसपास स्पेशल पुलिस आफिसर (एसपीओ) हैं। शुरूआत में भर्ती होने वाले एसपीओ का प्रतिमाह 6 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इसके बाद जैसे जैसे ड्यूटी की अवधि बढ़ती है। उस हिसाब से मानदेय में बढ़ोतरी होती है। लेकिन रिटायर होने तक अधिकतम मानदेय 16 हजार ही पहुंच पाता है।
कुछ एसपीओ ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि गृह मंत्रालय ने उनका मानदेय बढ़ाया था। अब उन्हें स्थायी होने की उम्मीद जगी है। कश्मीर में खासकर आतंकवाद से लड़ने में एसपीओ का बड़ा योगदान है। ऐसे में यदि केंद्र सरकार उन्हें स्थायी करती है तो 30 हजार एसपीओ का मनोबल भी बढ़ेगा और पुलिस महकमे के कामकाज में भी और बेहतरी आएगी। लंबे समय से एसपीओ अपने स्थायी होने की मांग करते रहे हैं।