नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले ग्रामीणों के लिए हर सुख सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार करोड़ो रुपय खर्च करने का दावा तो करती है, लेकिन जमीनी सतह पर हकीकत कुछ और ही है। सीजफायर उल्लंघन में घायल होने वाले घायलों को अपने घर से जिला अस्पताल या जिला अस्पताल से जम्मू रेफर करने पर पीड़ितों को एम्बूलेंस का पेट्रोल भी अपनी जेब से डालना पड़ता है।
इस बात का खुलासा शनिवार को उस समय हुआ जब मेंडर निवासी पाक गोलाबारी से एक घायल बच्ची को मेंडर से राजोरी और फिर राजोरी से जम्मू रेफर किया गया। पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि उन्हें जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद जम्मू रेफर कर दिया गया था। वह बच्ची को लेकर जब एम्बूलेंस में बैठे तो उन्हें पेट्रोल के पैसे मांगे गए। उन्हें कहा गया कि जब तक एम्बूलेंस में पेट्रोल नहीं डालेगे एम्बूलेंस नहीं जाएगी।
गरीब होने के कारण पीड़ित बच्ची के पास रुपेय नहीं थे व उसे कुछ लोगों से उधार लेकर एम्बूलेंस में पेट्रोल डालना पड़ा। वहीं उन्होंने सरकार के प्रति कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा कि न तो सरकार पड़ोसी देश को सबक सिखा कर हमें हर रोज की फायरिंग से निजात दिलाती है और न ही हमारे लिए काई विशेष सुविधा उपलब्ध करवाती है। एलओसी पर दोनों और से होने वाली गोलीबारी का नुकसान मात्र वहां रहने वाले गरीब व बेसहारा लोगों को ही उठाना पड़ता है। न बच्चे स्कूल जा पाते हैं और न मर्द लोग हर राज काम काज पर जाते हैं। फसलों की बात करो तो वो भी पाक सेना की मेहरबानी पर टिकी है।
वहीं एलओसी घायल से पेट्रोल के पैसे लेने की खबर जब डीसी राजेरी को लगी तो उन्होंने एडीडीसी को जांच करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
उदर जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास मात्र गर्भवति महिलाओं को मुफत जम्मू भेजने के लिए फंड्स आते हैं। इसके इलावा अन्य सभी मरीजों को जम्मू जाने के लिए अपनी जेब ही ढीली करनी पड़ती है।