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'भारत के पास पाकिस्तान को सबक सिखाने के कई तरीके'

Mon, 19 Sep 2016 11:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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उड़ी में मुठभेड़ के दौरान मोर्चा संभाले जवान - फोटो : PTI
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उड़ी में आतंकी हमला पाकिस्तान की नापाक हरकत है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के यूनाइटेड नेशन की काउंसिल के दौरे से पहले हमला कूटनीति का हिस्सा है, ताकि इस काउंसिल में कश्मीर का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जा सके। यह कहना है रिटायर्ड ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता का।  
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पाकिस्तान भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़े हुए है। अब वह खुलेआम आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा। कश्मीर में जो हालात इस समय हैं, उसे तूल देकर वह कश्मीर में आतंकवाद को बचाए रखना चाह रहा।

भारत के धैर्य की भी लगातार परीक्षा ली जा रही। भारत को भी चाहिए कि अब पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए। भारत के पास ऐसे कई तरीके हैं, जिससे वह पाकिस्तान का हुक्का-पानी बंद कर सकता है। भारत से ही पाकिस्तान को पानी जाता है। सिंधु जल समझौते के तहत पानी को दिया जा रहा है। भारत को इन संधि को नजरअंदाज कर पाकिस्तान का पानी बंद कर देना चाहिए।
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स्लीपर सेल ने की आतंकियों की मदद?

उड़ी में आतंकी हमला - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि तालिबान व आईएसआईएस भी विश्व में आतंकवाद फैला रहा है। जम्मू-कश्मीर का मामला अलग है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान पहले से ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा। उड़ी में आतंकी हमला एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा है। पाकिस्तान दरअसल कश्मीर का मुद्दा जिंदा रख कर अपने देश के वोट बैंक को पक्का करना चाहता है। इस नीति के तहत हमला किया गया है। 

रिटायर्ड ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता का कहना है कि इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि सुरक्षा में खामियां रही हैं। पहले से सूचना थी कि आतंकी बड़ा हमला कर सकते हैं। एलओसी से करीब 15-20 किलोमीटर अंदर ब्रिगेड हेडक्वार्टर में हमला करने मेें स्थानीय समर्थन या स्लीपर सैल की मदद दिए जाने की आशंका भी है।

आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार थे। उन्हें पता था कि जवान टेंट में हैं। इसलिए टेंट को आग लगाई। टारगेट के तहत वह हमला करने में कामयाब रहे। सुरक्षा बलों को भी चाहिए कि वह हेडक्वार्टर की सुरक्षा पर पुनर्विचार करें। सूचना के बाद ऐसी घटनाएं सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। 
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