सदन में चर्चा के बगैर बजट प्रस्तावों को लागू करने का आदेश जारी करने पर सरकार को चौतरफा विरोध झेलना पड़ा। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बजट प्रस्तावों को लागू करने के फैसले को सदन की अवमानना करार देकर बहस शुरू की।
इसके बाद कांग्रेस ने भी जोरदार विरोध किया। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब सत्ता पक्ष से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सत शर्मा ने फैसले का खुलकर विरोध जताते हुए विपक्ष की दलीलों का खुलकर समर्थन किया।
स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने सरकार को प्रस्ताव लागू करने के आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने तर्क दिया कि यह नई रिवायत नहीं है। राज्य और केंद्र में बजट प्रस्तुतिकरण के तुरंत बाद बजट प्रस्तावों की अधिसूचना जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि सदस्य इससे असहज हैं तो प्रस्तावों को होल्ड पर रखने का आदेश जारी होगा।
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई ही थी कि सत्तापक्ष को घेरने उठे उमर ने कहा हम जानते हैं आपके पास संख्याबल है। बजट प्रस्तावों को पारित भी करवा लिया जाएगा। लेकिन, संख्याबल के बूते सत्तापक्ष सदन का मजाक नहीं बना सकता है।
अभी बजट पर चर्चा जारी है। सदन में प्रस्ताव रखने का मतलब सहमति बनाना होता है, लेकिन, यहां पर तो चर्चा से पहले ही प्रस्तावों को लागू करने के आदेश किए जा रहे हैं। विपक्ष से भी तो कोई बेहतर सुझाव आ सकता है।