कर्ज चुकाने में जाएगा विकास का पैसा
2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की आबादी करीब 1.25 करोड़ है। इस आधार पर प्रति व्यक्ति हिस्से में कर्ज का बोझ औसतन एक लाख रुपये से ज्यादा बैठता है।
कर्ज का असर बजट पर भी साफ दिखाई देता है। सरकार को हर साल बड़ी राशि केवल पुराने कर्ज और उसके ब्याज की भरपाई में खर्च करनी पड़ रही है। वर्ष 2026-27 के बजट में ब्याज भुगतान के लिए 12,283 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह रकम बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बजाय कर्ज और उसके ब्याज की भरपाई में चली जाएगी।
स्कूलों को ज्यादा पैसा, कॉलेजों और अस्पतालों पर कम खर्च
बजट में यह साफ दिखता है कि सरकार ने खर्च की प्राथमिकताएं दो हिस्सों में बांटी हैं। कुछ विभागों का बजट बढ़ाया गया है जबकि कई अहम क्षेत्रों में कटौती की गई है। स्कूली शिक्षा को ज्यादा संसाधन मिले हैं लेकिन उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, कृषि और उद्योग जैसे विभागों को पहले के मुकाबले कम बजट में काम चलाना होगा।
बजट के ये बदलाव बताते हैं कि सरकार इस साल किन क्षेत्रों को आगे बढ़ाना चाहती है और किन पर खर्च सीमित रखा गया है। सरकार ने स्कूली शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाया है। दूसरी तरफ उच्च शिक्षा का बजट घटाया गया है जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नए भवन, प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक विस्तार की गति धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी संसाधनों का दबाव दिखता है। बजट में बिजली विकास विभाग को पहले के मुकाबले कम राशि दी गई है। सबसे ज्यादा कटौती इसी विभाग में हुई है। इसी तरह कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी कटौती की गई है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, निजी निवेश और रोजगार सृजन पर असर पड़ने की आशंका है।