कश्मीर के हालात के समक्ष रियासत से जुड़े अहम मुद्दे खासतौर से निकाय एवं पंचायत चुनाव का भविष्य अधर में तो लटका ही है, इसके अलावा केंद्र और राज्य प्रायोजित विकास गतिविधियां भी ठप पड़ गई हैं।
आलम यह है कि कश्मीर में जारी हालात का असर रियासत की अर्थव्यवस्था की रीड पर्यटन उद्योग से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान, परिवहन सेवा (सड़क एवं रेल) पर बुरी तरह से पड़ा है। जम्मू श्रीनगर नेशनल हाईवे को चौड़ा करने की परियोजना पर कार्य नौ जुलाई से ठप पड़ गया है।
नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के क्षेत्रीय अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि कश्मीर में हिंसा और जारी हालात से कश्मीर में जम्मू श्रीनगर नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम नौ जुलाई से ठप पड़ा हुआ है। फिलहाल हालात ऐसे नहीं हैं कि काम किया जाए। हालात सुधरने के बाद ही परियोजना पर कार्य बहाल हो सकता है।
पर्यटन, व्यापारियों को भारी नुकसान
श्रीनगर में तैनात सुरक्षा बल के जवान
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कश्मीर के हालात का सबसे बुरा असर जमीनी स्तर से जुड़े लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया जिसमें निकाय एवं पंचायती चुनाव करवाने पर पड़ा है। रियासत सरकार चुनाव करवाने की तैयारी में जुटी थी, लेकिन घाटी के बिगड़े हालात के चलते चुनाव का भविष्य अधर में लटक चुका है और वर्तमान वर्ष में चुनाव करवाना आसान नहीं दिख रहा। बिजली के क्षेत्र में आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट के अलावा पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना पर भी कश्मीर में काम ठप पड़ गया है।
व्यापारियों को अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। केवल कश्मीर के ही नहीं, इसमें जम्मू के व्यापारी जिनका सामान कश्मीर में बिकता था, उन्हें भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। पर्यटन के पीक सीजन में हालात बिगड़ने से पर्यटन उद्योग और इससे जुड़े कारोबारियों की कमर टूट चुकी है।
विकास की गति रुकी
विकास की गति अलगाववादियों के आंदोलन से थम गई है। सरकारी इमारतों से लेकर सड़कों, बिजली, पानी की दिशा में होने वाले काम ठप पड़े हुए हैं। अनुमान के अनुसार आंदोलन से अब तक करोड़ों का नुकसान सरकार और लोगों को हो चुका है।