गोलाबारी से छलनी हो रहे सीमावर्ती ग्रामीणों को पाक पर भरोसा नहीं रह गया है। उस पार की खामोशी भी अब उन्हें डराने लगी है। वह साफ शब्दों में कहते हैं कि पड़ोसी देश के हुक्मरान और उसकी सेना पर विश्वास करना अपना नुकसान करना है। उनका मानना है कि कवर फायरिंग के बाद कुछ पल की खामोशी में भी पाक रेंजरों की साजिश हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वह अपनी जमीन पर डटे हैं, तो बस सेना के सहारे। जैसे-जैसे गणतंत्र दिवस नजदीक आ रहा है पाक रेंजर्स घुसपैठ के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं। रुक-रुक कर की जाने वाली फायरिंग में भी अंतर देखा जा रहा है। सीमा पर सख्ती से बौखलाई पाक सेना कभी शाम तो कभी तड़के कवर फायरिंग कर हालात खराब करने में जुटी है।
देर रात की फायरिंग भी इसी का हिस्सा माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब सीमा पार की खामोशी से शांति की उम्मीद नहीं, बल्कि बड़े तूफान की आशंका रहती है। यह पहला मौका नहीं है, इस तरह की हरकत पहले भी कई बार पाक रेंजर्स ने की है। कुछ पल की शांति के बाद उसने रणनीति के तहत सीमावर्ती गांवों और पोस्टोें को निशाना बनाया है।
इस बार भी इसी बात को सोचकर लोग चिंतित हैं। ओबामा के भारत दौरे पर पड़ोसी देश हर हथकंडे अपना सकता है, ताकि किसी तरह जम्मू-कश्मीर मसला आगे बढ़े। मंगलवार और बुधवार को पाक रेंजरों ने अलग-अलग समय में भारतीय चौकियों को निशाना बनाकर फायरिंग की। इसके बाद शांत हो गए।
वीरवार की रात खामोशी छाई रही। इसे स्थानीय ग्रामीण साजिश का हिस्सा मान रहे। उनका साफ कहना है कि पाक और शांति की राह पर चले, यह सोचना ही अपने आप को धोखा देना है। एक दिन की चुप्पी में रेंजरोें की बड़ी प्लानिंग हो सकती है।