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'मोदी से मुलाकात में रियासत को क्या मिला'?

Tue, 22 Mar 2016 09:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू

सार

  • राजनीतिक दलों ने महबूबा-मोदी की मुलाकात पर उठाए सवाल
  • यासीन बोले, चर्चा के पहलू सार्वजनिक हों
  • हर्षदेव ने कहा, महबूबा बताएं, केंद्र से क्या मांगा था, क्या मिला   
  • प्रदेश अध्यक्ष मीर बोले, ढाई महीने की खामोशी का कारण बताएं महबूबा
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महबूबा मुफ्ती और प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : File
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विस्तार
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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह तय माना जा रहा है कि होली के बाद कभी भी रियासत में नई सरकार के गठन की घोषणा हो सकती है। पर महबूबा-मोदी मुलाकात के बाद रियासत के विभिन्न राजनीतिक दलों ने पीडीपी अध्यक्ष से उनकी प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात में हुई चर्चा के पहलुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही महबूबा द्वारा सरकार गठन का फैसला लेने में ढाई महीने का समय बर्बाद करने के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं।  
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जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के अध्यक्ष हकीम मोहम्मद यासीन ने कहा कि महबूबा अवाम को बताएं कि उनके और प्रधानमंत्री के बीच बैठक में आखिर क्या बात हुई। मसला एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरी रियासत का है।

अगर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने महबूबा को कुछ आश्वासन दिए हैं तो महबूबा को रियासत की अवाम को इसकी जानकारी देनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है और जैसा कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा था कि पीडीपी की कोई नई शर्त नहीं मानी जाएगी, तो भी महबूबा को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि आखिर किस आधार पर वह सरकार बनाने को तैयार हो गईं हैं।
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कांग्रेस का पीडीपी पर हमला

महबूबा मुफ्ती और प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : PIB
जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्षदेव सिंह का कहना है कि सवाल महबूबा के संतुष्ट होने का नहीं है, बल्कि सवाल इस बात का है कि क्या रियासत के लोगों की आकांक्षाएं पूरी हुईं हैं। महबूबा को बताना होगा कि उन्होंने केंद्र सरकार से क्या मांगा था और क्या उनकी मांगें पूरी हो गईं हैं। हर्षदेव सिंह ने कहा कि सरकार गठन को लेकर सौदेबाजी की अफवाहें भी चल रहीं थीं। पीडीपी अध्यक्ष को इस मामले में भी अपना पक्ष रखना होगा।

रियासत में नई सरकार के गठन में करीब ढाई महीने की देर करने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पीडीपी पर हमलावर रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि पीडीपी नई सरकार पर फैसला लेने से पहले घाटी की नब्ज टटोल रही थी। साथ ही आरोप लगाया गया कि पीडीपी ने अवाम को गुमराह करने का काम किया है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुलाकात के बाद महबूबा के रुख में आए बदलाव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर का कहना था कि महबूबा को यह बताना होगा कि एजेंडा आफ एलाइंस के बाहर पीडीपी को केंद्र सरकार से क्या हासिल हुआ है।

उन्होंने कहा कि रियासत में राज्यपाल शासन लागू कराने में भी महबूबा की अहम भूमिका थी। मीर ने कहा कि ढाई महीने तक रियासत में सरकार नहीं रहने से अवाम का नुकसान हुआ है। महबूबा को इस पर भी अवाम के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नई सरकार भी पुरानी भाजपा-पीडीपी सरकार की ही तरह होगी और अगर इसमें कुछ अलग होगा तो वह केवल यह कि इस बार मुफ्ती मोहम्मद सईद की जगह महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री होंगी। मीर ने भाजपा को भी आड़े हाथ लिया। कहा कि भाजपा ने सरकार बनाने के लिए पीडीपी की कोई नई शर्त न मानने की बात से भी ड्रामा रचा है।
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