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Jammu News: राजमार्ग के बंद रहने से फल अर्थव्यवस्था चौपट, 400 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

Wed, 10 Sep 2025 01:53 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
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कुलगाम की मंडी में फल कारोबारी। संवाद
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श्रीनगर। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहने से कश्मीर की फल अर्थव्यवस्था करीब 400 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ चरमरा गई है। सैकड़ों ट्रक फंसे हुए हैं और जल्दी खराब होने वाली खेप सड़क पर सड़ रही है।
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इस स्थिति के कारण उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में एशिया की दूसरी सबसे बड़ी फल मंडी सहित अन्य मंडियों ने दो दिनों के लिए कामकाज स्थगित किया है। सेब उत्पादकों का कहना है कि इस बार सेब उद्योग को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। रास्ते में फंसा माल सड़ रहा है और जो कुछ बाहर की मंडियों में पहुंचा वो भी खाने लायक नहीं बचा।
सोपोर के एक सेब उत्पादक वकार फैयाज ने बताया कि करीब 10 दिन से अधिक समय से राजमार्ग (एनएच-44) बंद पड़ा है। सैंकड़ों गाड़ियां रास्ते में फंसी हैं और जो पहुंची भी हैं तो उनमें अधिकतर माल खराब हो गया है। उन्होंने बताया कि अगर करीब एक लाख का माल बाहर भेजा तो उसमें 30 हजार रुपये ही आए। करीब 80 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जो गाड़ियां शुरू में कुछ दिन फंसने के बाद पहुंचीं उनमें 10 से 15 प्रतिशत माल ठीक निकला, लेकिन जो बाद में पहुंची उनका लगभग सब माल सड़ा हुआ निकला।
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शोपियां के एक अन्य किसान मोहम्मद रमजान ने कहा कि हाईवे पर सैंकड़ों गाड़ियां रास्ता बंद होने के चलते फंसी हुई हैं। मेरी दो गाड़ियां यहां से निकली थीं, लेकिन गाड़ियां रास्ते में हैं। उनमें तो बदबू उठना शुरू हो गई है, माल पूरी तरह सड़ गया है। कई गाड़ियां जो काजीगुंड में फंसी थीं उन्होंने वापस माल शोपियां मंडी में अनलोड किया, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक माल सड़ा हुआ निकला।
कश्मीर फल उत्पादक और विक्रेता संघ के अध्यक्ष फैयाज़ अहमद मलिक (काका जी) ने अमर उजाला को बताया कि फलों से लदे करीब 1500 से अधिक ट्रक एनएच-44 पर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमें पहले ही अभी तक करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अगर राजमार्ग फिर से नहीं खुला तो यह नुकसान और बढ़ सकता है। हमने और नुकसान को रोकने के लिए मंगलवार और बुधवार को सभी व्यापारिक गतिविधियां सोपोर और अन्य मंडियों में रोकने का फैसला किया है। हम और खेप बर्बाद होने का जोखिम नहीं उठा सकते। मलिक ने कहा कि जल्दी खराब होने वाली उपज, खासकर बगुगोशा (नाशपाती) और गाला सेब को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि हमने पहले ही उत्पादकों से अपील की थी कि स्थिति में सुधार होने तक कटाई और पैकिंग बंद कर दें। दुर्भाग्य से फंसा हुआ स्टॉक तेज़ी से खराब हो रहा है।
बारामुला के रफियाबाद के एक उत्पादक मेहराजुद्दीन ने कहा कि जो पहले 600 रुपये प्रति डिब्बा बिकता था। अब घटकर 400 रुपये रह गया है। अगर अधिकारी तुरंत हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो उद्योग चौपट हो जाएगा। हालांकि अधिकारियों ने मुगल रोड से वाहनों की आंशिक आवाजाही की अनुमति दे दी है। अध्यक्ष ने कहा कि छह टायर वाले ट्रकों को आवाजाही की अनुमति दी गई है, लेकिन हम 10 टायर वाले वाहनों के लिए भी अनुमति की मांग कर रहे हैं।
तभी फंसे हुए माल को क्लियर किया जा सकेगा। व्यापारियों और उत्पादकों ने संयुक्त रूप से सरकार से फलों के ट्रकों की आवाजाही को प्राथमिकता देने की अपील की है और चेतावनी दी है कि लंबे समय तक व्यवधान रहने से घाटी में लाखों परिवारों का भरण-पोषण करने वाला यह क्षेत्र तबाह हो जाएगा। उनके अनुसार कश्मीर की अर्थव्यवस्था बागवानी पर आधारित है। गौरतलब है कि कश्मीर संभाग के सेब उत्पादक श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग के लंबे समय तक बंद रहने पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि परिवहन व्यवधान ने जम्मू-कश्मीर के सबसे आकर्षक उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। हाल ही में आई बाढ़ ने पहले ही बागों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की स्थिति और बिगड़ गई है। बढ़ती परिवहन लागत अब मुनाफे के मार्जिन को कम कर रही है, ऐसे में सेब उत्पादकों को डर है कि इस व्यापार पर निर्भर हजारों परिवारों के लिए सीजन खराब होने वाला है।
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