- हाईकोर्ट ने चार साल से जेल में बंद यूएपीए के आरोपी को दी जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने यूएपीए और एनडीपीएस से जुड़े एक मामले में कहा है कि अदालत केवल अभियोजन की बात मानकर पोस्ट ऑफिस की तरह काम नहीं कर सकती, बल्कि उसे यह भी देखना होगा कि सबूत कितने मजबूत हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।
आरोपी अमीन अल्लाई अनंतनाग का रहने वाला है और मार्च 2021 से जेल में बंद था। एनआईए ने उस पर आरोप लगाया था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था और उससे मिलने वाला पैसा आतंकी गतिविधियों में लगाया जा रहा था। हाईकोर्ट ने केस का रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि आरोपी के पास से कोई भी नशीला पदार्थ या अन्य आपत्तिजनक चीज बरामद नहीं हुई। उसके खिलाफ मामला मुख्य रूप से सह-आरोपियों और एक अप्रूवर के बयानों पर आधारित है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे बयान अपने आप में कमजोर सबूत होते हैं। जब तक उनके समर्थन में कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य न हो। केवल इनके आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का नाम सिर्फ फोन संपर्क और जान-पहचान के आधार पर सामने आया है। केवल संपर्क होना या किसी को जानना, साजिश में शामिल होने का सबूत नहीं माना जा सकता। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की भूमिका सीधे तौर पर किसी बरामदगी या लेन-देन से जुड़ी नहीं है। उस पर पहले 2012 में एक एनडीपीएस केस जरूर दर्ज हुआ था लेकिन उस मामले में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी पिछले करीब चार साल से जेल में है और ट्रायल अभी पूरा होने में समय लग सकता है। ऐसे में उसे लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के जमानत खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी को सशर्त जमानत देने का निर्देश दिया।