एसआरओ 43 के तहत नौकरी के हकदार, फिर भी खा रहे ठोकरें
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद जवानों के बच्चे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उन्हें अपने हक़ के लिए भटकना पड़ रहा है।
उनके अनुसार हाल में उन्हें मुख्यमंत्री ने भी आश्वासन दिया था, लेकिन संबंधित विभाग उनकी फाइलें विभाग के पास होने से ही इंकार कर रहा है। 253 से अधिक ऐसे मामले हैं, जिनके पिता पुलिस की नौकरी के दौरान अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए हैं, लेकिन उनके बच्चों को आज तक इंसाफ नहीं मिल पाया है।
सायमा सज्जाद (28) आज भी अपने हक़ के लिए सरकार से गुहार लगा रही हैं। उनके अनुसार उनके पिता सज्जाद अहमद शाह जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस की 8वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर थे।
1990 में अनंतनाग ज़िले के गोपालपुरा इलाके में वह आतंकियों के साथ हुई क्रास फायरिंग में शहीद हो गए थे। सायमा के अनुसार उस समय वह दो साल की थीं। सायमा के अनुसार उनके परिवार में वह और उनका एक भाई (25 वर्ष) है।
पहले पेंशन मिल रही थी, लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में वह भी बंद कर दी गई। अब जबकि उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए, तो यह हक़ नहीं दिया जा रहा। उन्होंने मांग की कि एसआरओ 43 के तहत नौकरी दी जाए। सायमा कहना है कि वह दो वक्त की रोटी तक के लिए तरस रहे हैं।