केंद्र सरकार ने शुक्रवार को नेशनल हाइड्रो-पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी) द्वारा संचालित पनबिजली परियोजनाओं के जम्मू-कश्मीर को हस्तांतरण से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, इन परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने से भी इनकार किया है।
पीडीपी-भाजपा गठबंधन द्वारा एजेंडा ऑफ एलायंस में पावर प्रोजेक्टों को राज्य को वापस दिलाने का वादा किया गया था, जिसका जवाब देते हुए केंद्र ने जवाब दिया कि ‘राज्यों द्वारा केंद्र के सामने बहुत सी मांगें रखी जाती हैं, लेकिन हर मांग को फैसलों में तब्दील नहीं किया जा सकता’।
वहीं बिजली की हिस्सेदारी में 12 से 25 फीसदी करने को लेकर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूश गोयल ने कहा कि यह बिजली परियोजनाएं सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा संभाली जा रही हैं।12 फीसदी की बिजली में भागीदारी देश में सभी राज्यों के लिए एक सामान है। निजी कंपनियों के मानदंडों के अनुसार देश भर में यही हिस्सा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि बिजली भागीदारी में किसी भी राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। गोयल ने कहा कि मुनाफे में शेयर हितधारकों को दिया जाता है। अलग-अलग राज्यों के लिए मुनाफे में अलग से कोई हिस्सा नहीं हो सकता।