उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम के बम निरोधक दस्ते से राय ली। बताया गया कि जब्त की गई विस्फोटक पदार्थ के किसी भी समय फट जाने और इससे बड़े पैमाने पर मानव जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इसके बाद तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू की इजाजत से आईईडी मैटीरियल को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डिस्पोज करा दिया गया। अन्य दस्तावेजों को सील करके, वस्तुओं को जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेज दिया।
इसी बीच लव करण तनेजा का तबादल हो गया और आगे की जांच डीएसपी प्रियंका कुमारी को सौंपी गई। सीएफएसएल, चंडीगढ़ से रिपोर्ट आने के बाद हथियारों को मार्क करके 9एमएम पिस्तौल से टेस्ट फायर किया गया। टेस्ट फायरिंग सफल रही। 9एमएम पिस्टल कार्ट्रिज जिंदा पाए गए। कुछ ही समय बाद डीएसपी प्रियंका कुमारी का तबादला हो गया और जांच डीएसपी गारू राम, एसडीपीओ विजयपुर के पास आ गई। वे भी कोशिशों के बावजूद असल आरोपियों का पता नहीं लगा पाए।
उनके तबादले के बाद केस की जांच डीएसपी रोहित कुमार ने संभाली। जांच के दौरान 24 संदिग्धों से पूछताछ की। लेकिन कोई ठोस सबूत या सुराग नहीं मिल पाया। करीब चार साल जांच के बावजूद कोई सुराग न मिलने और भविष्य में भी इसकी संभावना न मानते हुए इसे बंद कर दिया गया।
जांच अधिकारी रोहित कुमार, लवकरण अैर प्रियंका कुमारी के फाइनल रिपोर्ट के समर्थन में बयान के आधार पर मामले की जांच अनट्रेस्ड के रूप में बंद कर दी गई।
अदालत ने जांच अधिकारी के बयान पर संतुष्टि जताई
तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मदन लाल की अदालत ने पुलिस की कोशिशों और जांच अधिकारी के बयान पर संतुष्टि जताई। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर खुली जांच जारी रखना बेकार है। आरोपियों की खुफिया तलाश जारी रहेगी। फाइल रिकॉर्ड में भेजते हुए यह भी कहा कि अगर किसी भी स्तर पर पुलिस को कोई और सुराग या सबूत मिलता है, तो जांच फिर से प्राथमिकता के आधार पर शुरू की जा सकती है।