कश्मीर में आजकल आतंकियों द्वारा युवा ब्रिगेड को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए एक नया पैतरा अपनाया जा रहा है। वह अब सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं और आतंकवाद की ओर आकर्षित करने के लिए युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
आए दिन आतंकी अपने वीडियो, फोटो फेसबुक, व्हाट्सऐप्प आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल कर रहे हैं। लेकिन पुलिस का कहना है कि वह इस पर पूरी नजर बनाए हुए हैं और जल्द उनके खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में पिछले कई वर्षों से सक्रिय आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का मोस्ट वांटेड कमांडर बुरहान एक बहुत बड़ा उदहारण है, जो युवाओं को अपने साथ आतंकवाद में शामिल करने के लिए सोशल मीडिया का भरपूर फायदा उठा रहा है और जानकारी के अनुसार वह अब तक 30 के करीब पढ़े -लिखे युवाओं को आतंकवाद में शामिल कर चुका है।
10 लाख का ईनामी आतंकी है बुरहान
बुरहान ने पिछले करीब 5 वर्षों से पुलवामा जिले के त्राल इलाके को अपना हाईड-आउट बना रखा है और अभी तक सुरक्षा एजेंसियों को वह कई बार मुठभेड़ों के दौरान चकमा देने में सफल रहा है। दक्षिणी कश्मीर के खूंखार आतंकियों में से एक माने जाने वाला बुरहान एक सरकारी कर्मचारी का बेटा है।
उसके पिता सरकारी स्कूल के प्रिंसीपल हैं। इसके अलावा उसे दक्षिणी कश्मीर में एक बड़े आतंक के चेहरे के तौर पर भी जाना जाता है और यही कारण है कि उस पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 10 लाख का ईनाम भी रखा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार बुरहान समेत अन्य हिज्ब कमांडर कई वर्षों तक पाकिस्तान में ट्रेनिंग हासिल किए आतंकियों पर निर्भर रहते थे लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी रणनीति में बदलाव देखने को मिला है।
उसके नाम से कई अकाउंट और फैन पेज
एक तो वह युवाओं को सोशल मीडिया के जरिये लुभा रहे हैं। बुरहान फेसबुक पर काफी लोकप्रिय है क्योंकि उसके नाम से कई अकाउंट और फैन पेज बनाए गए हैं जिनमें टाइगर त्राल, एचएम त्राल, बुरहान त्राली, आदि जैसे कई फैन पेज हैं और अक्सर व्हाट्सऐप्प के द्वारा भी उसके वीडियो तथा फोटो वायरल होते हैं।
पिछले 6 महीनों के भीतर बुरहान द्वारा कई वीडियो और फोटो शेयर किए गए हैं और कइयों में तो आतंकियों ने अपने चेहरे तक नहीं छिपाये जो साफ इशारा करता है कि वह युवा पीढ़ी को संदेश देना चाहते हैं कि इस कार्य में कोई डर व खतरा नहीं है। वह वीडियो और फोटो को वायरल कर युवाओं की मानसिकता को बदलना चाहते हैं।
दूसरा वह युवाओं को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेज कर समय बर्बाद नहीं करना चाहते। वह पहले किसी युवा को जो आतंकवाद में शामिल होना चाहता है।
किसी की बंदूक छीन कर लाने का कार्य सौंपते हैं और जब कोई ऐसा कर दूसरा स्टेज पार करने में सफल रहता है उसे अपने साथ भर्ती कर लेते हैं क्योंकि ऐसा करने के बाद उस युवा के वापस सामान्य जिंदगी जीने के रास्ते बंद हो जाते हैं। इसके अलावा वह आतंकियों का भरोसेमंद भी बन जाता है।
21 अगस्त को हिज्ब की भर्ती रैली
खबरें ऐसी भी आ रही हैं कि 21 अगस्त को हिज्ब कमांडर बुरहान एक भर्ती रैली आयोजित करने वाला है और जो युवा आतंकवाद में शामिल होंगे, उन्हें 35,000 रुपये वेतन के तौर पर दिए जाएंगे। लेकिन उसके लिए एक शर्त रखी गई है कि केवल मैट्रिक पास युवा ही शामिल किए जाएंगे। यह भी एक पैंतरा लगता है युवाओं को लुभाने का।
इस संबंध में कश्मीर रेंज के आईजी एसजेएम गिलानी ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा इस सब पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल आतंकी पहले भी करते रहे हैं।
लेकिन अब युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया को कुछ ज्यादा इस्तेमाल में लाया जा रहा है जिसके लिए पुलिस पूरे कदम उठाए जा रहे हैं उनपर शिकंजा कसने के लिए। गिलानी ने बुरहान की भर्ती रैली की खबर को बोगस ठहराते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है यह केवल अफवाएं हैं लेकिन आतंकियों की गतिविधियों पर पैनी नजर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रखी जा रही है।
गौरतलब है कि हिज्ब कमांडर बुरहान कई हमलों में शामिल रहा है जिसकी तलाश काफी समय से सुरक्षा एजेंसियों को है लेकिन जिस तरह से वह अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है। वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।