कभी गणित का शिक्षक रहा रियाज नायकू अपने तेज और शातिर दिमाग से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बन गया। नायकू न सिर्फ आठ साल तक आतंकी वारदातों को अंजाम देते हुए सुरक्षा बलों को गच्चा देता रहा बल्कि उसने कई कश्मीरी युवाओं को बरगला कर आतंकी भी बना दिया।
नायकू के ढेर होने से कश्मीर में हिजबुल की कमर टूट गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आतंकियों की रैकिंग में नायकू को ए प्लस प्लस श्रेणी (सबसे ऊपर) में रखा गया था। मोस्ट वांटेड की सूची में सबसे पहला नाम नायकू का था जिस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था।
नायकू के मारे जाने से अब हिजबुल के साथ दूसरे आतंकी संगठनों का हौसला भी पस्त होना लाजमी है। बताया जा रहा है कि नई भर्ती से लेकर आतंकी ठिकाने बनाने और हमले को अंजाम देने की साजिश रचने में नायकू को माहिर माना जाता था।
नायकू के खात्मे के मायने
कश्मीर के स्थानीय युवाओं के हिजबुल से जुड़ने पर ब्रेक लगेगा
आतंकी साजिशों की प्लानिंग रुकेगी
हिजबुल के आतंकियों को कमान देने वाला कोई नहीं रहा
बचे आतंकियों का मनोबल टूटेगा
100 से अधिक युवाओं को जोड़ चुका था
हिजबुल मुजाहिदीन के लिए कश्मीर के स्थानीय युवाओं की भर्ती करने का जिम्मा रियाज नायकू पर ही था। नायकू कश्मीर के 100 से अधिक स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ चुका था। वह अभी भी कश्मीरी युवाओं को बरगला कर अपने साथ जोड़ रहा था।
... तो समझो हिजबुल भी खत्म
आतंकी रियाज का मारा जाना एक तरह से कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन का खात्मा है। ऐसा पुलिस भी मान चुकी है। कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि यदि रियाज नायकू को मार गिराया गया तो समझ लिजिए एक तरह से कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन का भी खात्मा हो गया।