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रुबिया अपहरण केस: आतंकवाद के खिलाफ एनआईए की कार्रवाई, आतंकी सरगना मुश्ताक लटरम की श्रीनगर में संपत्ति कुर्क

Fri, 03 Mar 2023 01:10 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

प्रवक्ता के अनुसार जरगर 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण समेत कई आतंकी घटनाओं में वांछित था। जरगर यूएपीए के तहत एक नामित आतंकवादी है और अपनी रिहाई के बाद से पाकिस्तान से काम कर रहा है।
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन के प्रमुख मुश्ताक जरगर लटरम की श्रीनगर में संपत्ति कुर्क की है। शहर के गनेई मोहल्ला में दो मरले (544 वर्ग फीट) में बने घर को जांच एजेंसी ने कब्जे में लिया।

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लटरम को 1999 में अपहृत इंडियन एयरलाइंस के विमान यात्रियों को कंधार में रिहा करने के बदले हरकत उल अंसार के संस्थापक (अब जैश ए मोहम्मद प्रमुख) मसूद अजहर व हरकत उल मुजाहिदीन प्रमुख उमर सईद के साथ छोड़ा गया था। सईद पाकिस्तान में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पेरी की हत्या में शामिल था।

ज्ञात हो कि गृह मंत्रालय ने पिछले साल अप्रैल में उसे यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया था। मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा था कि वह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में शांति के लिए खतरा है। उसके अल कायदा तथा जैश से करीबी संबधि रहे हैं।
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एनआईए के प्रवक्ता के अनुसार जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के साथ एनआईए की एक टीम ने प्रक्रिया को अंजाम दिया। टीम ने भगोड़े आतंकी की बहनों की मौजूदगी में घर पर नोटिस चस्पा की। ज्ञात हो कि एनआईए तथा पुलिस टीम जाने के बाद उसकी बहनों ने शोर शराबा करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया।

इसके बाद वे लौंट गईं। प्रवक्ता के अनुसार जरगर 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण समेत कई आतंकी घटनाओं में वांछित था। जरगर यूएपीए के तहत एक नामित आतंकवादी है और अपनी रिहाई के बाद से पाकिस्तान से काम कर रहा है।

घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि जरगर पहले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से जुड़ा था और कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार था। वह हत्याओं सहित अन्य जघन्य अपराधों में भी शामिल रहा है। अल-कायदा और जैश जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ उसके करीबी संबंध हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि जरगर नौहट्टा में पला-बढ़ा और जेकेएलएफ में शामिल हो गया। 1989 में वह रुबिया सईद का अपहरण करने वाले सदस्यों में से एक था और पांच आतंकवादियों के बदले में उसकी रिहाई के लिए बातचीत की। उसे 15 मई 1992 को गिरफ्तार किया गया था। 

 

31 दिसंबर, 1999 को इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट आईसी-814 के बंधक सौदे के तहत जेल से रिहा किया गया था। कंधार में विमान में अपहृत यात्रियों को छुड़ाने के बदले तत्कालीन भाजपा नीत सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह उसे लेकर 31 दिसंबर 1999 को कंधार गए थे।

जेकेएलएफ से नाता तोड़ बनाई थी अल उमर

प्रवक्ता के अनुसार 1990 में उसने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) से नाता तोड़कर आतंकी संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन का गठन किया। यह संगठन श्रीनगर के डाउनटाउन में कई बर्बर हत्याओं के लिए जिम्मेदार है। डाउनटाउन का रहने वाला जरगर आतंकी संगठन में शामिल होने से पहले ताम्रकार या ठठेरा (कॉपरस्मिथ) था।

मुजफ्फराबाद किया था शिफ्ट

कंधार एयरपोर्ट से रिहा होने के बाद लटरम को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के मुजफ्फराबाद भेज दिया गया। वहां उसने अल-उमर-मुजाहिदीन को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की। वह कई हत्याओं समेत बर्बर आपराधिक वारदातों में शामिल रहा।

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