अल उमर मुजाहिदीन प्रमुख मुश्ताक जरगर लटरम श्रीनगर के डाउनटाउन में कश्मीरी पंडितों समेत कई लोगों की हत्या में शामिल रहा था। कश्मीरी पंडितों का मानना है कि लटरम उस समय उनके लिए दहशत का दूसरा नाम था। उसके डर से लोग डाउनटाउन में घरों से बाहर निकलने से डरते थे।
कंधार कांड के दौरान कोट भलवाल जेल में बंद मसूद अजहर को जेल से लेकर एयरपोर्ट लेकर जाने वाले तत्कालीन डीआईजी जम्मू व पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि लटरम डाउनटाउन में आतंकवाद के लिए पूरी तौर पर जिम्मेदार था।
वह सुरक्षा बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, सेना व पुलिस पर हमले करता था। नब्बे के शुरुआत में उसने कश्मीरी पंडितों पर भी हमले किए। उनका कहना है कि उसके घर को कुर्क किया जाना अच्छा कदम है।
इससे आतंकवाद परस्त लोगों के खिलाफ अच्छा संदेश जाएगा। हालांकि, यह तभी होना चाहिए था जब 1999 में कंधार कांड के दौरान उसे छोड़ा गया था। ज्ञात हो कि कंधार कांड में ही लटरम को भी अपहृत यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था।