घाटी में आतंक का नया इंजीनियरिंग सामने आया है। अब आतंकी संगठनों की ओर से इंजीनियरिंग और काफी पढ़े लिखे युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। कुपवाड़ा में मारा गया रिसर्च स्कॉलर से आतंकी कमांडर बना मन्नान वानी भी इसी इंजीनियरिंग का हिस्सा रहा। ऐसा नहीं है कि पहले पढ़े लिखे युवा आतंकी संगठनों में शामिल नहीं होते थे, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है। घाटी के बाहर पढ़ने वाले युवाओं को भी दहशतगर्द अपने ग्रुप में शामिल करने लगे हैं। हाल ही में 13 पढ़े लिखे युवाओं के आतंक में शामिल होने के इनपुट हैं। इनमें ज्यादातर दक्षिणी कश्मीर से जुड़े हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पढ़े लिखे युवाओं का आतंक की ओर बढ़ता रुझान खतरे की घंटी है। हिजबुल के साथ ही लश्कर, जैश और अंसार गजवा-तुल- हिंद ने ऐसे युवाओं को टारगेट करना शुरू किया है। अब स्नातक, परास्नातक के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण करने वाले युवा भी आतंक का दामन थाम रहे हैं। तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सेहरई के एमबीए बेटे जुनैद अशरफ सेहरई भी हिजबुल के साथ है।
दक्षिणी कश्मीर के दहरुना गांव का जुबैर अहमद वानी एमफिल स्कॉलर था। दक्षिणी कश्मीर के तीन युवा जो जालंधर में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे, को भी पुलिस ने अंसार गजवा-तुल-हिंद के साथ जुड़े होने पर गिरफ्तार किया है। इससे पहले पीडीपी विधायक के घर से हथियार लेकर भागने वाले एसपीओ से संबंध के शक में दो छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया था। बाद में इन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
मन्नान से पहले कश्मीर विश्वविद्यालय का असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद रफी भट आतंकी बनने के दो दिन बाद ही शोपियां जिले में छह मई को मुठभेड़ में मारा गया था। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि कई युवाओं को मुख्यधारा में लौटाने में सफलता मिली है। इसके लिए परिवार वालों की ओर से अपील कराई जा रही है। आतंकियों के घर पर जाकर उनके जख्म पर मरहम लगाया जा रहा है ताकि वह आतंकी बने युवाओं से हिंसा का रास्ता छोड़न की अपील कर सकें।