सेना के सुंजवां सैन्य कैंप में गोली चलने से एक जवान की मौत हो गई। इस वारदात को लेकर दिनभर उथल- पुथल मची रही। शुरुआत में ये निकलकर आया कि जवान की मौत आतंकी हमले में हुई है। सेना की तरफ से भी सुबह बयान दिया गया कि संदिग्ध मौत के बाद ऑपरेशन लांच किया गया है। लेकिन देर शाम सेना ने साफ किया कि ये वारदात आतंकी हमला नहीं था। जवान की मौत के कारण का पता लगाया जा रहा है। हालांकि, वारदात के बाद अफरा तफरी मच गई। पुलिस के आला अधिकारी वारदात स्थल पर पहुंच गए।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 11 बजे सैन्य कैंप में तीन से चार गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पूरे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। पता चला कि संतरी के रूप में तैनात पंजाब के तरनतारन का रहने वाला कुलदीप सिंह खून से लथपथ गिर गया है। घायल को तत्काल सैन्य अस्पताल सतवारी पहुंचाया गया।
तभी सेना और पुलिस की तरफ से बयान दिया गया कि कुछ गोलियां चलने से जवान घायल हुआ है। इसे लेकर ऑपरेशन लांच किया गया है। इस वारदात की सूचना पाकर पुलिस का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) भी मौके पर पहुंचा। पुलिस टीम सुंजवां के नजदीक गुज्जर कॉलोनी के हर घर को खंगाला।
डीआईजी व एसएसपी ने लिया घटनास्थल का जायजा
वारदात की जानकारी पाकर डीआईजी शिव कुमार शर्मा, एसएसपी जोगिंदर सिंह, एसपी साउथ अजय शर्मा, एसपी ऑपरेशन कामेश्वर पुरी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। हालांकि टीम सैन्य कैंप के भीतर नहीं गई। कैंप के नजदीक एक दो मंजिला घर में करीब एक घंटे तक अधिकारियों ने घर के लोगों से पूछताछ की। यह मकान एक सांसद के भाई का बताया जा रहा है।
आठ घंटे बाद बताया कि आतंकी हमला नहीं था
बता दें कि सेना की तरफ से सोमवार सुबह बताया गया कि संदिग्ध गोली चलने से जवान घायल है। ऑपरेशन लांच किया गया है। तमाम न्यूज एजेंसियों, समाचार पत्रों, न्यूज चैनल, सोशल मीडिया पर इस वारदात को आतंकी हमला बताकर खबरें चलाई गईं। शाम को सेना ने स्पष्ट किया कि ये आतंकी हमला नहीं था।
छह वर्ष पहले भी हुआ था हमला
वर्ष 2018 में सुंजवां सैन्य शिविर पर आत्मघाती हमला हो चुका है। आतंकी अफजल गुरु की बरसी पर हुए हमले में छह जवान बलिदान हो गए थे। एक नागरिक मारा गया था। तीन आतंकी भी ढेर किए गए थे। हमले में 6 महिलाओं समेत 11 लोग घायल हुए थे।