पुंछ में हुआ यह हमला और इससे पहले हुए कुछ हमलों को अंजाम देने के एक जैसे तरीके से साफ हो गया है कि आतंकी अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए जंगल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये हमले शाम के वक्त किये जाते हैं। हमला करने के बाद आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगलों में भाग जाते हैं। इसलिए सेना की नजर अब जंगलों पर रहेगी। कल शाम हुए हमले के बाद से सेना ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती भी कर दी गई है।
पुंछ में तीनों हमलों की मॉडस ऑपरेंडी एक
पुंछ में दिसंबर से हुए तीनों हमलों की मॉडस ऑपरेंडी एक है। पहले से घात लगाए आतंकियों की ओर से शाम के वक्त सैन्य वाहनों पर हमले किए जा रहे हैं। यह हमले जंगल वाले इलाकों में हो रहे हैं। इसके बाद आतंकी भागकर जंगलों में छिप जा रहे हैं। अंधेरे का लाभ उठाकर आतंकी जंगल में दूर तक निकल जाते हैं।
30 महीने...छठी वारदात, 21 जवान बलिदान
पुंछ में पिछले 30 महीनों में आतंकियों की ओर से हमले की यह छठी घटना है। 2021 से शुरू हुई घटनाओं में अब तक 21 जवान बलिदान हो गए हैं। इन घटनाओं में कई जवान घायल भी हुए हैं।
दिसंबर से पुंछ में तीसरा हमला, 5 जवान बलिदान, कई घायल
ज्ञात हो कि इससे पहले आतंकियों ने 12 जनवरी को कृष्णा घाटी इलाके में सैन्य वाहनों को निशाना बनाया था, जिसमें चार जवान बलिदान हो गए थे। इससे पहले 22 दिसंबर 2023 को डेरा की गली इलाके में सैन्य वाहनों पर हमला किया गया था। अब यह तीसरा हमला है। इन तीनों हमलों में पांच जवान बलिदान हो गए, जबकि कई जवान घायल हुए हैं।
शाम को ही किया गया पुंछ में हमला
पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके में शनिवार शाम लगभग सवा छह बजे घात लगाकर एयरफोर्स के काफिले पर आतंकियों की ओर से फिर हमला किया गया। इस हमले में एक जवान बलिदान हो गए। चार अन्य घायल हैं।