सबसे पहले मसूद के भतीजे से मिली थी एम4 जम्मू-कश्मीर में एम4 कार्बाइन राइफल की पहली बरामदगी 7 नवंबर 2017 को हुई थी, जब जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का भतीजा तल्हा रशीद मसूद पुलवामा जिले में मुठभेड़ में मारा गया था। 2018 में यह हथियार दूसरी बार कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किया गया था, जब अजहर का एक और भतीजा उस्मान इब्राहिम मारा गया था।
इसके बाद 11 जुलाई 2022 को पुलवामा जिले के अवंतीपोरा इलाके में एक मुठभेड़ स्थल से एम4 कार्बाइन बरामद की गई, जहां जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर कैसर कोका और एक अन्य आतंकवादी को मार गिराया गया था।
जम्मू संभाग में सबसे पहले पुंछ में इस्तेमाल
दिसंबर 2023 में पुंछ में आतंकियों ने भारतीय सेना को निशाना बनाकर हमला किया था। इस हमले में 4 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ही ग्रुप पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली। हमले के बाद सोशल मीडिया पर एम4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल के वीडियो और तस्वीरें दिखाई गईं।
कब-कब हुआ जम्मू में इस्तेमाल
27 मार्च 2025: कठुआ के अंब क्षेत्र में
8 जुलाई 2024: कठुआ सैन्य काफिले पर
9 जून 2024: रियासी शिवखोड़ी से कटड़ा जा रही बस पर
26 जून 2024: डोडा जिले में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकियों से एम4 बरामद
चुनौती बढ़ी, लेकिन निपट लेंगेपूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने कहा, "मेरे कार्यकाल (दिसंबर 2016 से सितंबर 2018) के दौरान आतंकियों ने एम4 कार्बाइन राइफलों का लगातार इस्तेमाल नहीं किया था। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में हथियार छोड़ने के बाद कश्मीर में इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर देखा गया है। अब जम्मू संभाग में भी देखा जा रहा है। एम4 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से हताहत होने की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन उम्मीद है कि सुरक्षा बल इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटेंगे। मुझे लगता है कि इससे बुलेटप्रूफ वाहनों में बैठे लोग भी असुरक्षित हो जाते हैं। यही खतरा है।