उधर, कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में अगला एक महीना सेना के लिए कड़ी चुनौती वाला होगा। बांदीपोरा, कुपवाड़ा, बारामुला में पड़ी बर्फ अब पिघलने लगी है। आतंकियों के घुसपैठ के रूट साफ होने लगे हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं।
दरअसल, कश्मीर में नवंबर महीने में बर्फ पड़ना शुरू होती है। जनवरी तक काफी बर्फ पड़ जाती है। आतंकियों के लिए बर्फ में घुसपैठ करना मुश्किल हो जाता है। अप्रैल महीने से यह बर्फ पिघलने लगती है। तब कुछ जगहों पर फेंसिंग टूटी होती है। इसका लाभ उठाकर आतंकी घुसपैठ कर जाते हैं। इस घुसपैठ को रोकना सेना के लिए बड़ी चुनौती है।
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि बांदीपोरा, कुपवाड़ा और बारामुला एलओसी पर 200 से अधिक आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। जो अगले एक महीने तक घुसपैठ की कोशिशें करते रहेंगे। आतंकियों को पिछले दो तीन साल में काफी नुकसान पहुंचा है। पहले आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हुई, फिर एयर स्ट्राइक। आतंकियों के लिए कश्मीर में जमा होने वाला धन भी बंद हो गया।
आतंकियों का ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क ध्वस्त हो गया। इनके लिए हथियारों की सप्लाई कम हो गई। यहां तक कि कश्मीर में विदेशी आतंकियों की गिनती अब इक्का-दुक्का रह गई। कुल मिलाकर ऑपरेशन ऑल आउट की शुरूआत से लेकर अब तक 600 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। जो आतंकियों के लिए एक बड़ा आघात है। इसलिए आतंकी संगठन 2020 में जून और जुलाई के महीने में बड़े स्तर पर घुसपैठ करना चाहते हैं।