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आतंकियों की नई रणनीति की आशंका: जम्मू के जंगलों में फिर दिखे हथियारबंद संदिग्ध! उधमपुर-रियासी से पुंछ तक अलर्ट

Tue, 18 Aug 2026 12:17 PM IST
Nikita Gupta अरुण कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जैश-ए-मोहम्मद के इस्राइल ग्रुप के खात्मे के करीब सात महीने बाद जम्मू संभाग के कई जंगलों में संदिग्ध और हथियारबंद लोगों की गतिविधियों की सूचनाओं से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।
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सुरक्षाबल। - फोटो : बसित जरगर
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विस्तार
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जैश-ए-मोहम्मद के इस्राइल ग्रुप के खात्मे के करीब सात महीने बाद जम्मू संभाग के जंगलों में आतंकियों की सक्रियता फिर बढ़ गई है। कठुआ से किश्तवाड़ और भद्रवाह से उधमपुर, रियासी, पुंछ व राजोरी तक घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों के सबूत सामने आए हैं। इस इनपुट के बाद से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

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पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बल एक सप्ताह से कई इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। फरवरी में इस्राइल ग्रुप के कमांडर सैफुल्लाह समेत तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू संभाग में करीब 20 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने की बात कही थी। अब सात महीने बाद एक बार फिर उधमपुर के रामनगर से रियासी के पौनी तक हथियारबंद संदिग्धों के देखे जाने की सूचनाएं सामने आई हैं। इसके बाद सुरक्षाबलों ने संबंधित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

पुंछ जिले के सुरनकोट तहसील के बफलियाज में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी ठिकाना ध्वस्त किया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, आतंकी पहले भी एक साथ कई स्थानों पर अपनी मौजूदगी दिखाने की रणनीति अपनाते रहे हैं। इसका मकसद सुरक्षाबलों को अलग-अलग इलाकों में व्यस्त रखकर उनकी निगरानी व्यवस्था को चकमा देना और किसी दूसरे स्थान पर हमले का मौका तलाशना होता है। सैफुल्लाह ग्रुप की सक्रियता के दौरान भी आतंकियों ने इसी तरह अलग-अलग स्थानों पर मौजूदगी के संकेत दिए थे। सुरक्षा एजेंसियां मौजूदा गतिविधियों को भी इसी रणनीति से जोड़कर देख रही हैं।
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सर्दियों से पहले ठिकाने बदलने की आशंका
सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। किश्तवाड़ में ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। सर्दियां शुरू होने से पहले आतंकी अपने ठिकाने बदलने लगते हैं। ऐसे में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद तलाशी अभियान तेज किया गया है। स्थानीय लोगों में भी अब जागरूकता बढ़ी है और वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दे रहे हैं। इससे सुरक्षाबलों को आतंकियों के खात्मे में मदद मिल रही है। -डॉ. विजय सागर धीमान, रक्षा विशेषज्ञ
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