पहलगाम हमले के बाद घाटी में जन-जीवन से लेकर पर्यटन और बाजार सीधे-सीधे प्रभावित हैं। पहाड़ों की अर्थव्यवस्था का आधार पर्यटन बुरी तरह से पटरी छोड़ चुका है। विकास का क्रम भी टूट गया है।
जम्मू का पर्यटन उद्योग सहमा होटलों की बुकिंग हो रही रद्द
पहलगाम में हुए हमले के बाद जम्मू-कश्मीर का पर्यटन उद्योग गहरे संकट में आ गया है। होटलों की बुकिंग बड़े पैमाने पर रद्द हो रही हैं। टैक्सी चालकों से लेकर गाइड तक सभी का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
अनुच्छेद-370 के हटने व कोरोना संकट के खत्म होने के बाद जो पर्यटन दोबारा पटरी पर लौटा था, अब एक बार फिर मंदी के खतरे के साये में आ गया है। कारोबारियों को डर सता रहा है कि अगर हालात जल्द ही नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
होटलों की अप्रैल-मई की 40% बुकिंग रद्द : पटनीटॉप में होटल कारोबारी तारिक चौधरी बताते हैं कि 40% एडवांस बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। हरियाणा के परिवार ने मई में दस लोगों की बुकिंग कराई थी। हमले के बाद बुकिंग रद्द कर दी। टूर एंड ट्रेवल्स एसोसिएशन जम्मू के प्रधान आशुतोष गुप्ता बताते हैं कि हमले से पहले जम्मू से श्रीनगर के लिए रोजाना करीब 300 टैक्सी और 40 बसें जाती थीं। आज 70% टैक्सी और बसों के पास सवारियां नहीं हैं।
वैष्णो देवी के दरबार में कम हो रही श्रद्धालुओं की संख्या
आतंकी हमले के बाद मां वैष्णो देवी के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। सामान्य दिनों में भारी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते थे, लेकिन सुरक्षा को लेकर फैली आशंकाओं के चलते बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का आगमन कम हो गया है। शनिवार को शाम छह बजे तक 18 हजार 600 श्रद्धालु भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। हाल में हर दिन 40 हजार श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचते थे।
- कटड़ा में होटल संचालकों, ट्रैवल एजेंट्स और स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में यात्रा बुकिंग में 30-40% तक की गिरावट देखी गई है। श्रद्धालु सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं, और बड़ी संख्या में आने से फिलहाल परहेज कर रहे हैं। हालांकि कटड़ा से भवन तक सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त हैं
- सीआरपीएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। यात्रियों की स्क्रीनिंग और चेकिंग को और अधिक सख्त किया गया है। मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और प्रशासन श्रद्धालुओं का भरोसा जीतने की कोशिश में जुटा है
सात जिलों की सड़कों के सुधरने का और बढ़ा इंतजार
पहलगाम हमले के असर से राज्य के सात जिलों की सड़कों के सुधरने का इंतजार आैर बढ़ सकता है। हमले से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देरी की आशंका पैदा हो गई है। इसका असर पुंछ, राजौरी, उधमपुर, डोडा, रियासी, रामबन और कठुआ में पड़ेगा, जहां बड़ी आबादी सड़क विहीन है।
- शुरुआती जीआई सर्वे में राज्य से 2546 बस्तियों का चयन किया गया था। इनमें आधे से ज्यादा संख्या इन्हीं जिलों में थी। केंद्र सरकार ने पहले चरण में जम्मू-कश्मीर में एक हजार करोड़ रुपये से पीएम सड़क योजना शुरू करने की तैयारी की है। इसमें 400 से अधिक बस्तियों को सड़क का लाभ मिलने की उम्मीद है
दिल्ली में शुक्रवार को हुई बैठक का नतीजा सामने नहीं आ पाया है। इसके बावजूद अफसरों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार हमले से पहले लिए फैसले में बदलाव नहीं करेगी। सर्वे में राजौरी में 418, उधमपुर में 313, पुंछ में 308, डोडा में 230, रियासी में 195, रामबन में 189 और कठुआ में 158 सड़कों का चयन किया गया था।