सेना ने इसके लिए जेम पोर्टल पर टेंडर जारी किया है। नई साइट की विशेषता अंधेरे में लक्ष्य का पता लगाने की क्षमता होगी। इसकी मदद से कम से कम 500 मीटर तक किसी इंसान की मौजूदगी का पता लगा सके। इसके बाद 200 मीटर तक उसकी पहचान और 150 मीटर तक यह पहचानने की क्षमता होगी कि सामने वाला व्यक्ति सशस्त्र है या निहत्था।
इससे रात के समय ऑपरेशन में जवानों को लक्ष्य के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। यह साइट केवल रात में देखने के लिए ही नहीं होगी, बल्कि इसे एके-47 पर लगाया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर अलग से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। बैटरी और माउंट सहित इसका वजन करीब 450 ग्राम तक होगा। इसमें थर्मल इमेजिंग सेंसर, डिजिटल जूम और अलग-अलग तरीके से लक्ष्य देखने की सुविधा भी होगी। ब्लैक हॉट और व्हाइट हॉट मोड भी होंगे।
20 गोलियों की फायरिंग में भी नहीं बदलेगा निशाना
सेना ने साइट की सटीकता और मजबूती को लेकर भी कड़े मानक तय किए हैं। 100 मीटर की दूरी पर 20 गोलियां चलाने पर कम से कम 80 प्रतिशत हिट की क्षमता होगी। लगातार फायरिंग के दौरान भी साइट में तकनीकी गड़बड़ी नहीं होगी और उसका निशाना भी नहीं बदलेगा। खास बात ये है कि इसमें फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा भी होगी। साइट की बैटरी सामान्य संचालन में छह घंटे से अधिक तक चलेगी। इसमें कम से कम छह घंटे का एचडी वीडियो और 10 हजार एचडी फोटो स्टोर करने की क्षमता होगी। इसके साथ जवानों को साइट के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
मुठभेड़ में ऐसे हथियार जरूरी: धीमान
सेवानिवृत ब्रिगेडियर डॉ. मुठभेड़ में इस तरह विजय सागर धीमान ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ के हथियार बहुत ही जरूरी होते हैं। जवानों की ऑपरेशन की क्षमता जितनी ज्यादा बढ़ेगी दुश्मन के खात्मे की संभावना उतनी ज्यादा और जल्दी होगी। इस तरह का पहल सेना का नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे आतंकियों पर प्रहार और तेज होगा।