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800 का बिल था, कंपनी को ही देने पड़े 20 हजार

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यदि कोई मोबाइल कंपनी आपको बिना वजह बकाया बिल के लिए तंग करती है, तो आप कंपनी के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में जा सकते हैं। बशर्ते आप सही हों। एक मोबाइल कंपनी ने उपभोक्ता को मात्र 819 रुपये के बकाया बिल के लिए तंग किया, जिसके लिए कंपनी को 20 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये केस खर्च के अदा करने पड़े।
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भारतीय इतिहास में किसी कंज्यूमर फोरम द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक फैसला है। जम्मू जिला कंज्यूमर फोरम में उपभोक्ता ने भारती एयरटेल के खिलाफ शिकायत की कि कंपनी ने मानसिक रूप से परेशान करने के साथ उनकी छवि को खराब करने का प्रयास किया।

उपभोक्ता भारत भूषण ने शिकायत में कहा कि बीमार होने के कारण वह अपने पोस्ट पेड मोबाइल का 819 रुपये का बिल जमा नहीं करवा पाया। मोबाइल कंपनी ने तमाम मानदंडों का उल्लंघन करते हुए उसके कुछ दोस्तों और जिस संस्थान में वह काम करते हैं, उसके मालिक को भी बकाया बिल के बारे सूचित किया।
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साथ ही कहा कि आपका कैसा दोस्त है, जो इतनी छोटी सी बकाया राशि अदा नहीं कर सकता। इससे शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
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गैरकानूनी है इस तरह कॉल करना

इस तरह की रिकवरी गैरकानूनी है और कंपनी से इसके लिए पांच लाख रुपये मुआवजा दिलवाने की मांग की। शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि मोबाइल कंपनी ने इस तरह मानसिक रूप से परेशान करते हुए कई कॉल किए। ऐसी गैरकानूनी प्रक्रिया कंपनियों के अलावा कई बैंक भी अपने एजेंटों के मार्फत अपना रहे हैं। यह एजेंट लोगों को डराते धमकाते हैं।

कई देशों में इस गलत प्रक्रिया के खिलाफ सख्त कानून भी है। कंज्यूमर को दिए गए मोबाइल नंबर के अलावा अन्य मोबाइल नंबर पर कॉल करना भी गैरकानूनी है। दलीलों को सुनने के बाद फोरम ने माना कि इस तरह के परेशान करने वाले कॉल और खासकर उपभोक्ता के दोस्तों या उसके संस्थान में फोन करने से उसकी स्थिति शर्मनाक होती है।

इसलिए शिकायतकर्ता मानसिक रूप से परेशान किए जाने पर मुआवजे का हकदार है। फोरम ने मोबाइल कंपनी को आदेश दिया कि इसके लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये केस खर्च के रूप में अदा करे।
जेएनएफ
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