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दो स्पेशल ट्रेन से घाटी में फंसे बाहरी राज्यों के श्रमिक भेजा घर

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कशमीर से पहुचे मजदूर जम्मू रलेव स्टेसन पर पर पहुचे
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जम्मू। घाटी में उपजे तनाव के बाद लागू धारा 144 के कारण श्रीनगर सहित अन्य इलाकाें में फंसे हजारों की संख्या में श्रमिकों को वापस भेजने के लिए दो स्पेशल ट्रेन चलाई गई। बुधवार को जम्मू और उधमपुर रेलवे स्टेशन से इन ट्रेनों को चलाया गया। उधमपुर से दरभंगा के लिए 20 कोच की स्पेशल ट्रेन चलाई। इसमें 18 जरनल और 2 स्लीपर बोगियां लगाई गई थीं। जबकि जम्मू से चलाई स्पेशल ट्रेन के साथ सियालदा और अन्य ट्रेनों में अतिरिक्त बोगियां लगाकर तीन हजार के करीब श्रमिकों को रवाना किया गया। श्रीनगर से बुधवार को हजारों की संख्या में श्रमिक जम्मू और उधमपुर पहुंचे।
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श्रीनगर में विभिन्न स्थानों पर फंसे श्रमिकों ने पिछले 72 घंटों को सबसे भयानक बताया। दस साल से श्रीनगर में लकड़ी का काम करने वाले जमाल ने बताया कि इससे भयानक समय कभी नहीं देखा था। बुरहान वानी की मौत के समय स्थिति तनावपूर्ण थी, लेकिन पिछले तीन दिन का मंजर ही अलग था। श्रीनगर शहर में इतने सुरक्षा बल कभी नहीं देखे हैं। जमाल ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए कि जो कमाया था वह ठेकेदार के पास ही रह गया। पिछले तीन दिन से कुछ खाया भी नहीं है। सोमवार की रात को बस स्टैंड पहुंचे, लेकिन कोई भी बस नहीं मिली। तीन दिन बाद मंगलवार की रात एक बस मिली, जिससे जम्मू पहुंचे।
श्रमिकों का कहना था कि स्थानीय लोगाें ने शहर छोड़ने को कहा। स्थानीय लोगों का कहाना था बकरीद और 15 अगस्त के बाद हालात और खराब हो सकते हैं। इसलिए समय रहते यहां से चले जाओ। रेहड़ी पर काम करने वाले सोहिल ने बताया कि एक सप्ताह से रेहड़ी नहीं लगा पाए। तीन से चार दिन का ही खाने का सामान जमा किया था। वहां के हालात देखते हुए लगता नहीं कि हालात सामान्य हो जाएंगे। हालात को देखते हुए ही वापस आना पड़ा। स्थानीय लोगों ने भी वापस जाने को कहा। उनका कहना था कि हालात और खराब हो जाएंगे। जल्दी में आधा सामान भी वहीं रह गया। अब वापस जाने का फैसला हालात को देखकर ही करेंगे। श्रमिकों का कहना था कि अभी भी कुछ लोग वहां फंसे हैं। बसें नहीं होने से वह परेशान हैं, कुछ शरारती तत्वों ने हमारे लोगों से मारपीट भी की।
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हमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पिछले तीन दिन से कुछ खाया भी नहीं है। जो कमाया था वह भी वहीं रहा गया। इतना तनाव कभी नहीं देखा था। स्थानीय लोगों ने भी चले जाने को कहा ।
-जहांगीर, बिहार
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हमारे साथ मारपीट करने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों ने हमें यहां से चले जाने को कहा। उनका कहना था कि हालात और खराब हो जाएंगे। श्रीनगर बस स्टैंड पर बसों की कमी है। लोग जम्मू आना चाहते हैं लेकिन आ नहीं पा रहे हैं। सरकारी बसें नहीं चल रहीं। प्राइवेट बसों से यहां पहुंचे हैं।
-सोनू कुशवाहा, राजस्थान
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बुरहान वानी की मौत के समय हालात खराब थे, लेकिन इस बार माहौल अलग ही है। तीन दिन का राशन स्टोर किया था, पिछने एक सप्ताह से काम भी नहीं मिल रहा था। इतनी बुरी हालत कभी नहीं देखी। वहां बैठने से ज्यादा वापस आना ही उचित समझा।
-मोहम्मद तुबसिर, बिहार
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दो दिन में रेलवे ने विभिन्न ट्रेनों में छह हजार श्रमिकों को किया रवाना
जम्मू। श्रीनगर में फंसे उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिकाें को सुरक्षित उनके राज्यों तक पहुंचाने का बीड़ा रेलवे ने उठाया है। दो दिन में रेलवे ने स्पेशल ट्रेन सहित नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त बोगियां लगाकर यात्रियों को जम्मू और उधमपुर रेलवे स्टेशन से रवाना किया। इन यात्रियों में से अधिकांश यात्री श्रीनगर में काम करते थे। घाटी में तनाव के कारण यात्री वाहन नहीं चलने से कुछ दिनों से यह यात्री वहां फंसे थे।
6 अगस्त को रेलवे ने 800 लोगों को गाड़ी संख्या 12446 दुरंतो एक्सप्रेस से चार और अंडमान एक्सप्रेस से चार सौ लोगों को रवाना किया। सात अगस्त को गाड़ी संख्या 15656 उधमपुर- गुवाहाटी एक्सप्रेस में 11 सौ श्रमिकों को रवाना किया। सात को ही मालवा, उधमपुर-पठानकोट डीएमयू से एक हजार, डीएमयू उधमपुर-पठानकोट से 600 सौ, उधमपुर-दरभंगा स्पेशल ट्रेन से 2400 सौ श्रमिकों को रवाना किया। ब्यूरो
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