संजीव ने बताया कि वर्तमान में स्कूल पहुंचने के लिए दो घंटे का पैदल रास्ता है, लेकिन आज गांव में जागरूकता का स्तर बहुत ऊंचा है। 13 से बच्चों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्कूल में किंडर गार्टन भी है, जहां हर साल तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के 12 से 15 बच्चों को प्लेवे पद्धति में सिखाया जाता है।
...जब पेशेवर पहलवान ने दिया बेटी खिलाओ का नारा
संजीव कुमार कुश्ती के राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने इखनी स्कूल में ज्वाइन करते ही सबसे पहले गैंती और बेलता उठाकर खुद स्कूल परिसर में सुधार कार्य शुरू कर दिया। सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ बेटी खिलाओ का नारा दिया। बेटियों को खेल से जोड़ने पर जोर दिया, जिसका शानदार रिस्पांस भी मिला। इखनी स्कूल में तैनाती से पूर्व भी संजीव सैकड़ों स्कूली छात्राओं को दंगल की खिलाड़ी बना चुके हैं। संजीव ने बताया कि पौनी जोन के 15 हजार बच्चों को खेल के प्रति जागरूक किया। 300 छात्राओं को दंगल की खिलाड़ी बनाया, जिनमें से 20 छात्राओं ने प्रदेश स्तर पर कुश्ती में भाग लेकर समाज की सोच बदली।
लद्दाख के मुहम्मद अली को भी राष्ट्रीय पुरस्कार
लद्दाख में कारगिल जिले के मुहम्मद अली को भी राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। अली गवर्नमेंट मिडिल स्कूल करिथ शरगोल कारगिल में प्रभारी हेड मास्टर हैं। उन्होंने स्कूल को शिक्षा का ऐसा केंद्र बनाया, जो पूरे प्रदेश में मिसाल है।