बाढ़ से हुई तबाही से व्यापारिक वर्ग को हुए नुकसान से उभरने में मदद पहुंचाने के प्रयास के तहत सरकार ने व्यापारियों को कई कर रियायतें देने की घोषणा की है। सरकार ने बाढ़ से व्यापारिक रिकार्ड और सेल्स अकाउंट को हुई क्षति के कारण पंजीकृत डीलरों को दूसरी तिमाही में भरे जाने वाले रिटर्न को तीसरी तिमाही के रिटर्न भरने की आखिरी तारीख तक भरने का अवसर प्रदान किया है।
राहत सामग्री को पहले ही टोल टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। पंजीकृत डीलर जो बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए सामान को बदलना चाहते हैं और व्यापार को नये सिरे से आरंभ करना चाहते है उन्हें 31 दिसंबर 2014 तक प्रवेश शुल्क और टोल में भी रियायत दी जाएगी। 31 मार्च 2014 के अंत तक आडिट अकाउंट को भरने के लिए 31 मार्च 2015 तक की छूट दी है।
राज्य सरकार ने फैसला किया है कि राज्य में जो सामान आया और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के पास पड़ रहा और बाढ़ से क्षतिग्रस्त है, ऐसे नुकसान का आकलन करने वाला अधिकारी बाढ़ पीड़ित व्यापारियों से नुकसान की एफआईआर की कापी पेश करने का दबाव नहीं बनाएगा।
इस संबंध में व्यवसायिक कर विभाग राजस्व विभाग की सूचना पर कार्रवाई करेगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री ने व्यापारियों के संगठन एसईआरएफ के साथ बैठक में आश्वासन दिए थे। इसके बाद सरकार ने रियायतें देने का फैसला लिया है।