भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे राजोरी जिला आतंकवाद के उस दौर को महसूस कर रहा है, जब आए दिन आतंकी वारदातें और नरसंहार होते थे। गुलशन कुमार वो अभागे हैं जिन्होंने 24 साल बाद दूसरा नरसंहार देखा है। वर्ष 1999 में गुलशन की शादी हुई थी। उनकी बरात पर आतंकियों ने फायरिंग कर दी थी, जिसमें सात लोगों की जान चली गई। बारह लोग घायल हो गए। रविवार शाम आतंकियों ने जिन चार लोगों की घर में घुसकर हत्या की, उनमें गुलशन के जीजा प्रीतम लाल और भांजा आशीष भी शामिल थे।
गुलशन ने कहा, यह माहौल उस दौर की यादें ताजा कर रहा है, जब आतंकवाद अपने चरम पर था। आए दिन दहशतगर्दों के हमले और नरसंहार की खबरें सुनने को मिलती थीं। वर्ष 1999 की 19 फरवरी को उनकी शादी थी। बरात ने अभी खाना ही खाया था कि आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। सात लोगों की मौत हो गई। गुलशन ने कहा, तब रात को वारदात हुई और सेना दूसरे दिन सुबह के वक्त पहुंची थी।
इस बार शाम के वक्त हुए आतंकियों के हमले में उनके जीजा और भांजे समेत चार की मौत हो गई। देर तक सुरक्षा बल नहीं पहुंच पाए। उनके दिलो दिमाग में फिर से 24 साल पुराने मंजर घूम रहे हैं। गुलशन कुमार ने कहा, राजोरी में आतंकी वारदातें बढ़ रही हैं। दिसंबर में सेना की अल्फा टीसीपी के पास फायरिंग में दो लोगाें की जान चली गई। इसके 15 दिन बाद शाम को फायरिंग और अगली सुबह आईईडी धमाके ने छह लोगाें की जान ले ली। बिगड़ते हालात पर सुरक्षा एजेंसियों को काबू पाना होगा।