जम्मू कश्मीर में 13 वर्ष बाद नगर निगम के चुनाव हुए, लेकिन इसका फायदा न राज्य की जनता को मिला न ही शहरों की सूरत बदली। बल्कि पहले की अपेक्षा शहरों की स्वच्छता और सर्विस में गिरावट ही दर्ज की गई है। इसी के चलते पिछले वर्ष के मुकाबले जम्मू 117 और श्रीनगर 73 स्थान पीछे पहुंच गया है। राज्य के दोनों निगमों में पिछले चार महीने में कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। सभी जगह काउंसलरों को अब तक वार्डों में काम कराने के लिए फंड नहीं मिला है। जम्मू नगर निगम में चुनाव के बाद जनरल हाउस मीटिंग में काउंसलरों को 10-10 लाख रूपये का फंड जारी करने की बात हुई थी, लेकिन मार्च में अब तक यह फंड जारी नहीं हुआ। इससे शहर के सभी वार्डों में काम ठप पड़े हैं।
"स्वच्छ सर्वेक्षण में जम्मू कई पायदान नीचे खिसका है। मैनपावर की कमी और पिछले कुछ महीनों में काम नहीं हो पाना बड़ा कारण है। अगले वर्ष बड़े स्तर पर बदलाव आएगा। हम टॉप 10 में शामिल होने का पूरा प्रयास करेंगे।"-चंद्र मोहन गुप्ता, मेयर, जम्मू नगर निगम
"ताजा रैंकिंग के अनुसार हम अपनी कमियों को तलाशेंगे कि हम कहां पीछे रह गए। फिलहाल चार नए वार्ड और अन्य वार्डों के विस्तार से भी जिम्मेदारी बढ़ी है। जहां सर्वेक्षण के दौरान संभवत: तैयारी कम रह गई।"-प्रदीप मनहास ,ज्वाइंट कमीश्नर, जम्मू नगर निगम