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Jammu News: 65 जल निकायों की स्थिति खराब, संभाल की जरूरत

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पारंपरिक जल निकायों पर प्रस्तुति सह इंटरैक्टिव सत्र में भाग लेने वाले विद्यार्थी
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-जम्मू नगर निगम क्षेत्र में आते 65 जल निकायों को सूचीबद्ध और मैप किया
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- जेयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग और इंटैच ने जल निकायों पर किया अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू नगर निगम के अंतर्गत आते क्षेत्र में 65 जल निकायों को सूचीबद्ध और मैप किया गया है। इन जल निकायों के पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व पर विस्तृत अध्ययन किया गया है। इन सभी जल निकायों की स्थिति खराब हो रही है, इनके प्रबंधन के लिए हस्तक्षेप करने की जरूरत है। जम्मू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैच) जम्मू चैप्टर ने संयुक्त तौर पर इन जल निकायों पर अध्ययन किया है।
वीरवार को पारंपरिक जल निकायों को लेकर सह इंटरैक्टिव सत्र करवाया गया। जम्मू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज जम्मू चैप्टर ने इसे आयोजित किया। इसमें आवास एवं शहरी विकास विभाग की सचिव मंदीप कौर मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने जम्मू जिले के जल निकायों की सूची बनाने व अध्ययन करने के लिए विभाग और इंटैच जम्मू चैप्टर के प्रयासों की सराहना की। कहा कि कुछ पारंपरिक जल निकायों के कायाकल्प पर काम जारी है। ऐसे में इस तरह के अध्ययन के निष्कर्ष इन जल निकायों के प्रबंधन में सहायक होंगे। पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पीयूष मालवीय ने जल संरक्षण और प्रबंधन के सहयोगी तथा एकीकृत अध्ययन के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में पर्यावरण विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका सलाथिया ने जम्मू नगर निगम क्षेत्र के पारंपरिक जल निकायों की सूची और मानचित्रण पर हुए अध्ययन के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि प्राचीन कुओं, बावड़ियों और तालाबों वाले लगभग 65 जल निकायों को सूचीबद्ध और मैप किया गया है। इंटैच जम्मू चैप्टर के संयोजक एसएम साहनी ने जल निकायों को स्मार्ट सिटी मास्टर प्लान में शामिल करने का सुझाव दिया। साथ ही निकायों के आसपास के क्षेत्रों को हरित स्थानों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। जल निकायों की बहाली, उन्नयन और संरक्षण के लिए पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के लगभग 70 छात्रों और विद्वानों, विभाग के संकाय सदस्यों ने भाग लिया। ब्यूरो
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