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निजीकरण के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मचारी उतरे कलम छोड़ हड़ताल पर

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सांबा। जम्मू-कश्मीर पावर एंप्लाइज एंड वर्कर्स यूनाइटेड फ्रंट ने पावर सेक्टर के निजीकरण के कदम का विरोध किया। इसे लेकर कर्मचारी संगठन ने शनिवार प्रदर्शन किया। वीरवार की आधी रात से कर्मचारी कलम छोड़ हड़ताल पर चले गए हैं।
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उनका कहना था कि जब तक सरकार निजीकरण को रोकने का लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक काम का बहिष्कार रहेगा। हालांकि बिजली कर्मचारी 2019 से ही आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों मांग कर रहे थे कि अनबंडलिंग रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरा न करने और सभी स्तरों पर समिति द्वारा अनिवार्य पदों के सृजन करना, सभी कर्मचारियों के पीडीएल/टीडीएल, डीपीसी के नियमितीकरण पर एक श्वेत पत्र जारी करना, अनुदान सहायता से वेतन को अलग करना और विभिन्न निगमों में प्रति नियुक्ति पर सभी पीडीडी कर्मचारियों के लिए नियमित बजट जारी करना, पीडीडी की सेवा शर्तों का श्वेत पत्र जारी करना शामिल है। उन्होंने कहा कि हम अभी भी आंदोलन में विश्वास नहीं करते हैं, लेकिन टकराव का रास्ता सरकार द्वारा किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब तक संयुक्त मोर्चा (जेकेपीई और डब्ल्यूयूएफ) का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक पीडीडी/पीडीसी के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। बिजली विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही।
बिजली ठप रहने से जलापूर्ति बाधित
हड़ताल का दिखा असर, पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति रही ठप्प
अरनिया। मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे विद्युत कर्मियों का असर दिखना शुरू हो गया। इससे शनिवार सुबह से लगभग पूरे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति ठप रही। इस दौरान जलापूर्ति बाधित रही।
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शनिवर को सोहागपुर, चक्क शेरा, सई व ब्यासपुर आदि क्षेत्र के रिसीविंग स्टेशन सुबह चार बजे से ही बंद होना शुरू हो गए, जिससे आज पूरा दिन लोग परेशान होते रहे। पंच दर्शन लाल, जगदेव राज, सोमवार राज, ओम प्रकाश, रोशन लाल, मदन सिंह व गार सिंह आदि ने बताया कि शुक्रवार सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक विद्युत आपूर्ति ठप रही। शनिवार सुबह से अभी तक आपूर्ति ठप है। अरनिया क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र है, इस समय किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। विद्यत आपूर्ति ठप रहने से सिंचाई भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा घरों में लगे इनवर्टर भी लगभग डेड हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अंधेरा पसरा रहा। अभी तक बिजली आने की संभावना नहीं है। क्षेत्र के लगभग सभी गांव पाकिस्तानी सीमा से सटे हैं।
भाजयुमो के आरएस पुरा प्रधान सोनू पंडित ने कहा कि कम से कम सीमावर्ती हल्के का ख्याल तो करना चाहिए। क्योंकि दुश्मन अंधेरे का लाभ उठा सकता है। इसीलिए कम से कम रात को बिजली तो बहाल कर दो, बाकी रही आपकी मांगें तो हम भी आपके साथ चलेंगे। बही देर शाम खबर लिखे जाने तक ब्यासपुर में साढ़े छह बजे बिजली बहाल कर दी गई, जबकि अन्य क्षेत्र अंधेरे में डूबे रहे।
खौड़ के कई क्षेत्रों में बिजली ठप रही
ज्यौड़ियां। खौड़ के कई क्षेत्रों में शनिवार सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक (खबर लिखे जाने तक) बिजली ठप रही। इसका कारण बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों की पेन डाउन हड़ताल रहा। क्षेत्र में भी बिजली विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी शुक्रवार रात 12 बजे से काम छोड़ हड़ताल पर चले गए।
क्षेत्र के लोगों के अनुसार सुबह नौ बजे से गांव चक्क मलाल, मट्टू, म्यूनिसिपल कमेटी के सभी 13 वार्डों, देरियां, पगांली, हमीरपुर सिदड़, सैंथ, घरड, वदोवाल, घिगडयाल, दतेयाल, दोयाल, दानपुर, भोरपुर सहित आदि कई गांवों में बिजली आपूर्ति ठप रही। इस विषय में विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सुबह नौ बजे के करीब क्षेत्र की 33 केवी लाइन में खराबी आ गई थी। हड़ताल के चलते किसी ने फाल्ट ठीक नहीं किया। इसके चलते बिजली बंद रही है।
इस बारे में अपनी पार्टी के प्रभारी विजय कुमार शर्मा, दीपक सिंह पार्षद आदि ने बताया कि सुबह से बिजली बंद रहने से काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। लोगों के मोबाइल तक डेड पड़ गए हैं।
सांबा में सुबह से बिजली आपूर्ति ठप
सांबा। निजीकरण को लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से सांबा में शनिवार सुबह से ही बिजली आपूर्ति ठप रही। समाजसेवी कमल भट्टी, विकेश अंबा, अमन गुप्ता आदि ने बताया कि बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से लोगों को परेशानी बनी हुई है। सुबह से ही आपूर्ति ठप है। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। संवाद
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