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एक ऐसा गांव जहां नाग आते हैं अठखेलियां करने

Sun, 07 Aug 2016 06:37 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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सांप - फोटो : Demo Pic.
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जहां तर्क और विज्ञान हार जाते हैं, वहां आस्था और विश्वास की जीत होती है। मंदिरों के शहर जम्मू से करीब दस मील दूर बिश्नाह तहसील का छोटा सा गांव नौगरां करीब ढाई दशक पूर्व ऐसे ही श्रद्धा एवं विश्वास का केंद्र बिंदु बना था। वर्ष 1990 के अक्टूबर महीने में नौगरां से गुजरते नाले में बने एक साधारण से कुंड में नागों का झुंड अचानक प्रकट हुआ।
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प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सबसे पहले विनोद, सन्नी आदि बच्चों ने देखा और डरकर भागे। गांव वालों को जानकारी दी, कौतूहलवश सभी वहां पहुंचे। पहले पहल लोगों को लगा कि यह सांपों का सामान्य सा झुंड है, लेकिन जब एक ही स्थान पर नागों की उपस्थिति 15 से 20 दिन तक बनी ही रही तो आस्था जाग उठी।

साधारण सा कुंड सर्पों के झुंड के चलते ‘नाग कुंड’ बन गया। यह खबर आग की तरह फैलने लगी कि नौगरां गांव में ‘नाग देवता’ का प्राकट्य हुआ है। नाग कुंड के दर्शनों को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तक से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं। पगडंडी वाले गांव के आसपास बड़े-बड़े वाहनों की भीड़ जुटने लगी।
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प्रसाद, फूल-माला और खानपान की दुकानें सज गईं। नौगरां पूरी तरह कस्बे की तरह लगने लगा। कुंड और उसके आसपास सर्पों का झुंड करीब 6 महीने तक विचरण करता रहा। इस दौरान गांव वालों ने श्रद्धालुओं के सहयोग से नाग कुंड के पास मंदिर निर्माण की नींव रखी। मंदिर 1995 तक बनकर तैयार हो गया, जो आज नाग मंदिर के नाम से विख्यात है। 

मेंढक और नाग एक साथ
यूं तो सर्प के पास मेंढक नहीं रहते, मगर इस नाग कुंड में नागों के साथ मेंढक, मछलियां सब निवास करते रहे। गांव की एक प्रत्यक्षदर्शी सुमन शर्मा कहती हैं कि नागों और मेंढकों के बीच मित्र भाव और उनकी कई दिनों तक मौजूदगी से ही गांव वालों को विश्वास हुआ कि यह अद्भुत स्थान है।

नहीं होता था विश्वास
प्रमिला गुप्ता कहती हैं कि  इस स्थान की मान्यता के अनुसार लोग यहां आकर नाग देवता से मन्नत मांगते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। शुरुआती दिनों में आसपास के गांववासी कहते थे कि नौगरां वालों ने प्लास्टिक के नाग रख दिए हैं, लेकिन जब उन्होंने खुद आकर देखा तो श्रद्धा से भर गए। 

गांव को मिल गई सड़क
मंदिर के पुजारी जयराम बताते हैं कि इस गांव तक पहुंचने का साधन पगडंडी थी, लेकिन जब से नाग कुंड की प्रसिद्धि बढ़ी तो यहां छोटी ही सही मगर सड़क बना दी गई। अब भी कभी-कभी नाग-नागिन आते हैं और मंदिर परिसर सहित नाग कुंड के समीप अठखेलियां करते दिख जाते हैं।
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