पाकिस्तान के राष्ट्रपति अब्दुल अय्यूब सोचते थे कि 1965 की लड़ाई में भारत कभी भी एलओसी पार नहीं करेगा । दरअसल अय्यूब के ये सोचने के पीछे एक पूर्वाग्रह था । जवाहरलाल नेहरू के देहान्त के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री को पाकिस्तान एक कमजोर प्रधानमंत्री की नजर से देखता था । पर कैसे इन छोटे से कद वाले प्रधानमंत्री ने लाहौर में लहरा दिया भारत का तिरंगा झंडा- तस्वीरें
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भारत पाक युद्ध 1965
- फोटो : File Photo
लाल बहादुर शास्त्री खुद भी एक सामान्य परिवार से आते थे और छोटी कद काठी के एक मृदुभाषी नेता थे । पाकिस्तान समझता था कि शास्त्री कभी भी सेना को सीमा पार कोई कार्रवाई करने की अनुमति नहीं देंगे ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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पर पाकिस्तान का ये पूर्वाग्रह ही उसकी हार का कारण बन गया । जब भारत की फौज को पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का पता चला तो सेना ने भी बिना देर किये सीमा पार कार्रवाई करने का मन बना लिया ।
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लाल बहादुर शास्त्री
- फोटो : BBC
1965 की लड़ाई में भारतीय सेना के जवानों के हौसलों के आगे पाकिस्तान के सेना बौनी हो गयी थी। आलम ये था कि कश्मीर को हासिल करने का सपना देखने वाला पाकिस्तान खुद लाहौर और सियालकोट को खो देने की कगार पर आ गया था ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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सेना के अदम्य साहस के बल पर भारत लाहौर तक कब्जा करने की स्थिति में पहुंच चुका था । भारत की सेना अटारी के रास्ते वाघा सीमा को पार करते पाकिस्तान के 18 किमी अंदर लाहौर तक पहुंच गयी थी ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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पाकिस्तान को घेरने के लिए शिमला से एक रोज पहले पंजाब पहुंची सेना की 9 जैकलाई रेजीमेंट ने वाघा सीमा पार करके लाहौर की तरफ कूच की थी । जैकलाई को आक्रमण के एक रोज पहले ही शिमला से पंजाब आने को कहा गया था ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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लाहौर के रास्ते पर बढ़ रही भारतीय सेना के 9 जैकलाई के जवानों को पता चला कि भारतीय सेना की एक टुकड़ी को पाकिस्तानी सैनिकों ने घेर लिया है, इस कारण एक बार कुछ देर के लिए भारतीय सैनिकों को मोर्चे से पीछे भी हटना पड़ा ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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पर इस बात की जानकारी के बाद इन जवानों ने मिग 58 गन से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी । दूसरी ओर इसी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना ने भी बमबारी करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों के हौसले को तोड़ दिया ।
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भारत की ओर से इतने मजबूत पलटवार से पाक की सेना के मंसूबे कमजोर हो गये । सेना के हौसले से पाकिस्तान की सेना को 18 किमी तक पीछे ढ़केलने में कामयाबी मिली । भारतीय फौज ने लाहौर पर कब्जा कर लिया और वहां एक पुलिस स्टेशन पर तिरंगा लहरा दिया गया ।
इस कब्जे के बाद भारत की सरकार और सेना ने सीजफायर की घोषणा कर दी । जैकलाई रेजीमेंट में तैनात इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अगर सीजफायर न हुआ होता तो लाहौर और सियालकोट पर भारत का कब्जा बना रहता । इस लड़ाई में भारत की जीत का पूरा श्रेय सेना और प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्व को ही दिया जाता है ।