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जब मंत्री के काफिले के आगे होने लगी पत्थरों की बारिश

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बेशक मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद मुगल रोड को इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल कर रहें, लेकिन यह मार्ग अभी यातायात के लिए सुरक्षित नहीं। खुद राज्य के परिवहन मंत्री इस बात के गवाह हैं।
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जो सड़क पर गिरने वाले पत्थरों की चपेट में आते-आते बच गए। इसके बाद मंत्री ने यातायात पुलिस और मुगल रोड प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर को पत्थरों के गिरने पर रोक के लिए व्यापक कदम उठाने के लिए कहा।

दो हफ्ते पहले मुगल रोड को यातायात के लिए खोला गया था, लेकिन इन दो हफ्तों में दो सड़क हादसों में छह लोगों की जान जा चुकी है।

न तो सड़क की हालत इस काबिल है कि यहां से बड़े पैमाने पर लोग गुजर सकें और न ही पत्थरों के गिरने को रोकने को कोई ठोस कदम। ऐसे में यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं।
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जब मंत्री बने शिकार तब माना

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले परिवहन मंत्री अपने काफिले के साथ वाया मुगल रोड राजोरी पहुंचे। यहां वह रात अधिक होने पर पीर की गली में ही रुक गए। इस दौरान उन्होंने देखा कि लगातार पहाड़ों से पत्थर गिर रहे हैं। रात भर पत्थर गिरते रहे।

जब वह चंडीमढ़ के पास पहुंचे तो वहां भी काफिला बाल-बाल पत्थरों की चपेट में आने से बचा। मंत्री अब्दुल गनी कोहली ने इस बात की पुष्टि की है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि मुगल रोड पर काफी जगहों पर स्टोन शूटिंग हो रहा है।

उन्होंने विभाग को सलाह देते हुए पत्थरों को रोकने के लिए कहा है, तभी यहां से गुजरना संभव होगा। खुद इंजीनियरिंग किए मंत्री ने विभाग से कहा है कि जब पत्थरों की रोकथाम करनी हो तो निचली साइड की जगह ऊपरी साइड पर जाकर करें।
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साहेब, इस सड़क की हालत खराब है

जब पहाड़ के आगे होने की जगह पीछे होकर पत्थर रोकेंगे तो कोई खतरा नहीं होगा। मंत्री ने पूरे रोड पर यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस को नजर रखने के लिए कहा है, ताकि कोई दुघर्टना होने पर तुरंत कार्रवाई जा सके।

मुगल रोड की हालत जगह जगह खराब है। कई जगहों पर स्टोन शूटिंग है। गोली से भी अधिक रफ्तार में पत्थर नीचे गिर आते हैं, जो गुजर रहे किसी भी वाहन को अपने साथ हजारों फुट दूर तक घसीट कर ले जाएं।

ऐसे में वाहन का नामो निशान नहीं बचेगा। मुगल रोड पर सुरक्षा भी नाममात्र है।
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