- 10 खोखे बने हैं स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत, 8 लाख रुपये की आई लागत
- ज्यूल चौक को अलग स्वरूप प्रदान करना और रेहड़ियां हटाना था मकसद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जनवरी 2022 में बने 10 बांस के खोखे दो साल सात माह के बाद भी आवंटित नहीं हो पाए हैं। इस पर आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसका मकसद ज्यूल चौक को अलग स्वरूप देना और यहां जाम की समस्या का निदान करना था।
खोखों को यहां रेहड़ियों पर सामान बेचने वालों को आवंटित किया जाना है। जून 2022 में इस पर काम हुआ, मगर इसके बाद ये ठंडे बस्ते में चला गया। अभी तक खोखे बंद ही पड़े हैं। खोखे खुलने से सबसे ज्यादा फायदा लोगों को रोजगार के रूप में मिलना था। वे एक ही जगह में बैठकर सामान बेच पाते। स्मार्ट सिटी परियोजना के मुताबिक खोखे आवंटित करने पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। पहले औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण काम रुका था। खोखों को गरीब तबके के लोगों को आवंटित किया जाना है।
शाम चार बजे के बाद चौक में लगता है जाम
शाम चार बजे के बाद चौक में लोग रेहड़ियों पर सामान बेचते हैं। दूसरी तरफ मेटाडोर स्टैंड के कारण भीड़ रहती है। इस कारण कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। खोखे आवंटित होने से अवैध रेहड़ियां चौक से हट जाएंगी।
कोट
चुनाव आचार संहिता खत्म के बाद खोखे आवंटित करने का काम आरंभ होगा। इसके लिए कार्रवाई रुकी हुई है। टेंडर के माध्यम से ये आवंटित किए जाएंगे।
- सुनील ठुस्सू, परियोजना निदेशक, स्मार्ट सिटी