श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में श्रीकुला फाउंडेशन की ओर से आयोजित कश्मीर साहित्य महोत्सव के दूसरे संस्करण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता के बाद लेखकों के एक समूह ने अपने वैचारिक एजेंडे को आकार देने के लिए हमारे इतिहास को विकृत किया है। लेखकों को भ्रामक ऐतिहासिक विवरणों को चुनौती देने और उन्हें सही करने के लिए शोध करना चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ के दौरान नृत्य नाटिका शृंगार लहरी से मुख्य अतिथि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का स्वागत किया गया। नृत्य नाटिका के दौरान कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद उपराज्यपाल और आयोजकों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। आयोजकों ने कश्मीर में आयोजित किए जा रहे साहित्य महोत्सव के दूसरे संस्करण की जानकारी दी। इसके बाद एलजी ने मंच से उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज युवा इतिहासकारों को उन झूठों को चुनौती देते हुए सटीक और तथ्यात्मक रूप से सही विवरण प्रस्तुत करने होंगे। पिछले कुछ वर्षों में नए लेखकों ने भारत के इतिहास के साथ हुए अन्याय को न्याय दिलाने का प्रयास किया है जो एक उत्कृष्ट पहल है।
भारतीय साहित्य को दुनिया तक पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जो अत्यंत सराहनीय है। एलजी ने अभूतपूर्व चुनौतियों और अवसरों का सामना करने तथा प्रकृति, संस्कृति और जनकल्याण की समझ विकसित करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे पाठकों के लिए नए दृष्टिकोण और दृष्टि प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। संबोधन के बाद उन्होंने आयोजकों को स्मृति चिह्न भेंट किए और कार्यक्रम के आयाेजन के लिए धन्यवाद दिया। इस दौरान उन्होंने एक विवरणिका का भी विमोचन किया।