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अपशिष्ट मृदा और भूजल स्वास्थ्य के लिए गंभीर हानिकारक : डॉ. अफरोज

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- एनजीटी सदस्य न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद ने बांदीपोरा में डीईपी की समीक्षा की
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- डीईपी तैयार करने और उसे लागू करने में बांदीपोरा प्रशासन की सराहना भी की
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली के सदस्य न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद ने शनिवार को बांदीपोरा जिले का दौरा कर जिला पर्यावरण योजना (डीईपी) के निर्माण और क्रियान्वयन के संबंध में एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की। उन्होंने वैज्ञानिक मृदा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व पर जो देते हुए कहा कि अनुपचारित और विरासत में मिला अपशिष्ट मृदा और भूजल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
उन्होंने पृथक्करण, पुनर्चक्रण और जैव-उपचार जैसे वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने, अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन करने और उपचार के उद्देश्यों के लिए पर्यावरणीय निधियों के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया। स्वच्छ पर्यावरण को एक मौलिक अधिकार बताते हुए डॉ. अफरोज ने सभी हितधारकों से पारिस्थितिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरण के अनुकूल और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया। डीईपी तैयार करने और उसे लागू करने में बांदीपोरा प्रशासन द्वारा अपनाए गए व्यापक और व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना भी की।
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बैठक के दौरान बांदीपोरा के डीसी ने सरकारी आदेश संख्या 81-जेके (जीएडी) 2019 के अनुसरण में तैयार की गई जिला पर्यावरण योजना 2024 की रिपोर्ट पेश की जिसमें पर्यावरण संबंधी कार्य योजनाओं की देखरेख के लिए एक जिला पर्यावरण समिति का गठन किया गया है। यह बताया गया कि 345 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्रफल और लगभग 1.99 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र के साथ, बांदीपोरा जिला समग्र पर्यावरणीय स्थिति को सुरक्षित सीमा के भीतर बनाए रखता है।
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